सांसद ने जिला निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि फार्म-7 के माध्यम से दर्ज सभी संदिग्ध आपत्तियों की शीघ्र, निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बिना व्यक्तिगत सत्यापन एवं विधिक प्रक्रिया के किसी भी वोटर का नाम न हटाया जाए।
सपा आदित्य यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के अंतर्गत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए है। सांसद ने जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की है। सांसद ने अपने पत्र में फार्म-7 के कथित दुरुपयोग का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से हजारों मतदाताओं के नाम निर्वाचक नामावली से हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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सांसद ने पत्र में अवगत कराया कि उनके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों के अनुसार कुछ राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों द्वारा फार्म-7 का दुरुपयोग करते हुए मतदाताओं के नाम कटवाने हेतु आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, जबकि संबंधित फार्म न तो स्वयं मतदाताओं द्वारा भरे गए हैं और न ही उनके किसी अधिकृत परिजन द्वारा।
पत्र के अनुसार यह कथित अनियमितताएं विशेष रूप से विधानसभा क्षेत्र बिसौली, बिल्सी, शेखुपुर एवं दातागंज में सामने आई हैं। इसके अतिरिक्त बदायूं एवं सहसवान विधानसभा क्षेत्रों से भी इसी प्रकार की शिकायतें निरंतर प्राप्त हो रही हैं। सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के अंतर्गत प्रकाशित एकीकृत मूल निर्वाचक नामावली में संबंधित मतदाताओं के नाम विधिवत दर्ज हैं, इसके बावजूद बिना मतदाता की जानकारी अथवा सहमति के फार्म-7 दाखिल किया जाना भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। सांसद आदित्य यादव ने अपने पत्र में यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि यह पूरी कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से एक जाति विशेष को लक्षित कर उनके मताधिकार को प्रभावित करने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने इसे भारतीय संविधान, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950, भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों तथा संविधान के अनुच्छेद-326 की भावना के सर्वथा विपरीत बताया है।
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सांसद ने जिला निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि फार्म-7 के माध्यम से दर्ज सभी संदिग्ध आपत्तियों की त्वरित, निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बिना व्यक्तिगत सत्यापन एवं विधिक प्रक्रिया के किसी भी मतदाता का नाम निर्वाचक नामावली से न हटाया जाए। यदि फार्म-7 के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ तथा भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली को भी प्रेषित की गई है।