जिले के बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में मातृ समितियों का कोई सत्यापन नहीं हुआ है। सहसवान में फर्जी तौर पर बनी मातृ समितियां नौ लाख से अधिक के घोटाले में आरोपित हैं। इस प्रकार जिले की हर परियोजना पर मातृ समितियों में घोटालाें की जांच नहीं हो सकी है। सहसवान परियोजना में समितियों से जुड़ी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय रुका हुआ था। अब इनको भी मानदेय शुरू कर दिया गया है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो जिलेभर में मातृ समितियों के गठन की जो प्रक्रिया निदेशालय ने तय की है, उसके अनुसार इनका गठन नहीं हुआ है। इनमें बड़ी संख्या में सास-बहू, मां-बेटी, बहनें आदि शामिल कर ली गई हैं। कुंवारी भी इसमें शामिल हैं। जबकि कुंवारियों को इसमें स्थान इसलिए नहीं हैं कि जिनके बच्चे आंगनबाड़ी में जाते हैं, उन्हीं को इसमें शामिल किया जाता है। हॉटकुक्ड में पहले एनजीओ ने गड़बड़ियां की हैं और अब इन समितियाें को मौका दिया गया है।
जिन समितियों पर भरोसा, रह चुकी हैं दागी
बाल विकास विभाग ने समितियों पर भरोसा किया है। इसके बारे में पिछला इतिहास देखा जाए तो समितियां भरोसे लायक नहीं हैं। सहसवान में ऐसी समितियां दागी हैं और आरोपित हैं। इसीलिए इनका मानदेय भी रुका था। जो बाद में जारी कर दिया गया है।
हॉटकुक्ड संचालन कर रहे एनजीओ हटने के बाद निदेशालय के निर्देश पर उन्होंने मातृ समितियों के मार्च में हॉटकुक्ड का धन आवंटित कर दिया है। पिछले समय में मातृ समितियाें का गठन हुआ है। उनके समय में इनका गठन नहीं हुआ था। अभी बिना सत्यापन के ही समितियों का धन दे दिया गया है लेकिन आगे इनका सत्यापन भी करा लिया जाएगा।
- निर्मल शर्मा, प्रभारी डीपीओ, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग