जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही से एक महिला को बृहस्पतिवार को बीच सड़क पर बच्ची को जन्म देना पड़ा। आलम यह हुआ कि रास्ते से गुजर रही महिलाओं को घेरा बनाकर उसकी लाज बचाना पड़ी।
यह घटना उझानी के गांव गुराई निवासी इब्बन अली की पत्नी साबिया खातून के साथ हुई। प्रसव पीड़ा होने पर 32 वर्षीय साबिया तो समय पर जिला महिला अस्पताल पहुंच गई थी। मंगलवार को जब वह पहुंची तो वहां के स्टाफ ने डिलीवरी में एक-दो महीने का समय बताकर लौटा दिया था। उसे तब तक कुछ जांच कराने को कहा गया था। जांच कराने के बाद रिपोर्ट दिखाने के लिए इब्बन और साबिया खातून बृहस्पतिवार को फिर जिला महिला अस्पताल पहुंचे। इस बार उन्हें वहां डॉ. रिजवाना मिलीं, उन्होंने भी उसकी प्रसव पीड़ा को नहीं समझा। अभी सातवां महीना बताते हुए उसे अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दे दी। इस पर साबिया ने लावेला चौक के एक निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया। करीब चार बजे बाहर आकर महिला को पति इब्बन ने रिक्शे पर बैठा दिया, तभी उसे तेज पीड़ा हुई। तब इब्बन ने उसे रिक्शा से उतारकर उसी निजी अस्पताल के बाहर सड़क पर बैठा दिया। इसी बीच निजी अस्पताल गेट पर साबिया ने बेटी को जन्म दे दिया। इस दौरान वहां पर काफी लोग जमा हो गए, महिलाओं ने साबिया के इर्दगिर्द घेरा बनाया। बेटी का जन्म होने के बाद दंपति उसी रिक्शा से जिला महिला अस्पताल पहुंचा और जमकर नाराजगी जताई। इब्बन अली इतने गुस्से में था कि बोला- उसकी ससुराल गोरखपुर में ही है, वह सीएम से पूरे मामले की शिकायत करेगा।
मामला संज्ञान में आया है। सवाल उठ रहा है कि जब गर्भ का समय लगभग पूरा हो गया था तो आखिर महिला को बार-बार क्यों टरकाया गया। उसकी सामान्य डिलीवरी अस्पताल में क्यों नहीं की गई। डॉ. रिजवाना और स्टाफ की भूमिका की जांच कराई जाएगी। -डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ