कंवरगांव रोड पर डग्गामार में लटककर यात्रा करते लोग। संवाद
बदायूं। जिले के आंवला, दातागंज, बिल्सी, ककराला, कादरचौक आदि मार्ग ऐसे हैं जहां डग्गामार ही सहारा हैं। देहात से शहर आने वाले लोगों की संख्या प्रतिदिन 10 से 12 हजार के आसपास रहती है। कोर्ट से लेकर अधिकारियों से मिलने व अन्य काम के लिए यहां लोगों का हर रोज ही आना-जान लगा रहता है। यह लोग डग्गामार वाहनों से सफर करने को मजबूर हैं।
शहर से आंवला की दूरी करीब 30 किलोमीटर है। बदायूं-आंवला मार्ग पर रामपुर, बरेली, मुरादाबाद, संभल आदि जगह के लिए वाहन जाते हैं। यहां रोडवेज की दिन में महज दो बसें ही चलती हैं। दिनभर डग्गामार ही एक मात्र सहारा रहते हैं। इस मार्ग पर रोजाना दो से तीन हजार लोग सफर करते हैं। इस मार्ग पर कुंवरगांव समेत 40 से अधिक गांव पड़ते हैं।
बदायूं- बिल्सी मार्ग पर भी बस नहीं है। हालांकि बिल्सी में नए बस अड्डे के लिए जमीन देखी जा चुकी है। जल्द ही यहां बस अड्डे का शिलान्यास होना है। मुख्यालय से इस्लामनगर तक करीब 60 किलोमीटर मार्ग पर दो रोडवेज बसें हैं। इनमें एक सुबह और दूसरी बस शाम को जाती है। दिनभर लोग डग्गामार के सहारे ही रहते हैं। इस मार्ग पर हर रोज करीब पांच से छह हजार लोग आते-जाते हैं।
मनौना धाम बनने से बढ़ गई यात्रियों की संख्या
आंवला के पास ही खाटू श्याम बाबा का मंदिर मनौना धाम बनने से इस रूट पर यात्रियों की संख्या पहले की तुलना में करीब दो गुना बढ़ गई है। रोजाना कई लोग यहां दर्शन करने जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, करीब एक से डेढ़ हजार यात्री रोजाना इस मार्ग पर सफर करते हैं। परिवहन निगम के अफसर यहां के लिए बस शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
कुंवरगांव होकर आंवला के लिए बरेली व रामपुर डिपो की एक-एक बस है। यात्रियों की संख्या बढ़ी तो इस मार्ग पर अतिरिक्त बसें लगा दी जाएंगी। जैसे ही कुछ नई बसें आएंगी, उन्हें नए मार्ग पर लगाया जाएगा। - अजय कुमार, एआरएम, परिवहन निगम