खलील का पूरा परिवार मेडिकल कॉलेज में भर्ती
सकरी जंगल निवासी करीब आधा दर्जन ऐसे परिवार हैं, जिनका प्रत्येक सदस्य बुखार की चपेट में है। ऐसे ही परिवारों में खलील अहमद भी शामिल है। खलील, उनकी पत्नी नसीम, बेटा नन्हे और बेटी निदा का इस वक्त राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती है।
इसके अलावा सलीम, नसीर अहमद, अब्दुल हमीद, दिलशाद, शमशुल, रजुल, आशिक अली, इदरीश, नियाज अहमद, मुजाहिद, शह मोहम्मद, अलाउद्दीन और शाहिद आदि के परिजनों में एक-दो लोग भी बुखार की चपेट में हैं।
पहले चपेट में आ चुके हैं बसोमा और मानकपुर के लोग
इलाके में बुखार का प्रकोप पहले भी सामने आ चुका है। कोरोना से पहले बसोमा गांव में बुखार फैला तो दो महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। उस वक्त बसोमा के हर घर में बुखार का मरीज निकला था। मानकपुर में भी एक मौत हुई थी। मानकपुर और बसोमा में गंदगी की वजह से संक्रामक रोग भी फैल गए थे।
बिलहरी में पांच लोगों में डेंगू के लक्षण
अलापुर क्षेत्र के गांव बिलहरी में बुखार से चार दिन में तीन लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में ग्राम पंचायत सदस्य यास्मीन (45) पत्नी आले नबी और गुलफशा बेगम के परिजनों ने निजी लैब में जांच कराई थी, जिसमे उन्हें डेंगू पॉजिटिव बताया गया था। नबी खान की भी बुखार से शनिवार को मौत हो गई थी।
तीन मौतों की सूचना पर गांव में सीएमओ के निर्देश पर एक टीम भेजी गई, जिसने लोगों की जांच की और दवाएं वितरित कीं। रविवार को भी विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर जांच की। एमओआईसी डॉ. शुशान बनर्जी ने बताया 125 लोगो की मलेरिया की जांच की गई है, जिसमे एक व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण मिले है। 75 लोगों की डेंगू की जांच की गई, जिसमें पांच में डेंगू के लक्षण पाए गए है। कैंप में 295 लोगो को दवा वितरण की गई।
सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने बताया कि उझानी क्षेत्र के गांव सकरी जंगल और म्याऊं के बिलहरी में बुखार से मौतों की सूचना मिली थी। टीम के साथ मैं स्वयं गया था और लोगों की जांच करके दवाएं दी गई हैं। जिनमें बीमारी के लक्षण मिले हैं उनकी जांच को सैंपल लिए गए है। रिपोर्ट आने के बाद ही सही जानकारी हो सकेगी। प्रभावित क्षेत्रों में टीमें लगी हैं और लगातार काम कर रही हैं।