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Budaun News: बिना पंजीकरण कई प्रदेशों तक दौड़ लगा रहीं 20 से अधिक स्लीपर बसें

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स्लीपर बस को चैक करते परिवहन विभाग के अ​धिकारी। स्रोत-विभाग - फोटो : udhampur news
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बदायूं। स्लीपर बसों का जिले में पंजीकरण नहीं है, बावजूद इसके 20 से अधिक बसें कई प्रदेशों तक दौड़ रही हैं। कई बार चालान किए जाने के बावजूद संचालक परिवहन विभाग को राजस्व क्षति पहुंचा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जिले में 270 प्राइवेट बसों का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण है। इनमें से 170 बसों को फुटकर सवारियों के लिए जिले के सात रूटों पर संचालित होने का परमिट दिया गया है। करीब सौ बसें ऐसी हैं, जिन पर टूरिस्ट परमिट है।
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स्लीपर बसें गांव देहात से गैर प्रांतों तक दौड़ लगा रहीं हैं। इन बसों के संचालक थाना-चौकी से सांठगांठ करके गैर जनपद तक बसों का प्रतिदिन संचालित करते आ रहे हैं। इन बसों के चलने का समय ऐसा है कि यहां से निकलेगी सुबह में तो लौटकर रात में ही आती हैं। ऐसे में इन बसों पर अधिकारियों की नजर कम पड़ती है। कभी-कभार ही विभागीय अधिकारी कार्रवाई करते हैं।
इसी तरह पंजीकृत टूरिस्ट बसें मानक से अधिक सवारियों को लेकर हर रोज संचालित की जा रहीं हैं। जिले के सात रूटों पर संचालित होने वालीं बसों में किसी का परमिट टूटा हुआ है तो किसी का रजिस्ट्रेशन नहीं है। करीब 30 बसें मानक के अनुरूप नहीं चल रहीं हैं। उन पर विभाग के अधिकारियों की जब नजर पड़ती है तभी कार्रवाई की जाती है।
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प्राइवेट बसों के संचालन के लिए यह सात रूट हैं तय
प्राइवेट बसों के संचालन के लिए परिवहन विभाग की ओर से सात रूट निर्धारित किए गए हैं। इनमें बिल्सी रोड, उसावां डहरपुर, इस्लामनगर बिल्सी वायां कुरऊ, बिसौली आंवला सहसवान, बदायूं, सहसवान-बबराला, बदायूं-सहसवान वाया उझानी, बदायूं-कादरचौक, बदायूं-आंवला गैनी मार्ग शामिल हैं।


परमिट टूटा था फिर भी दौड़ रहीं थीं बसें
परमिट टूटने के बाद भी छह बसें ऐसी मिलीं जो दिन-रात दौड़ रही हैं। बुधवार को एआरटीओ (प्रशासन) अमरीश कुमार ने इन बसों को रोककर चैक किया। इनमें से दो बसों का परमिट खत्म हो चुका था। तीन बसों का परमिट मानक से अलग था। बावजूद इसके बस का संचालन जारी है। वहीं एक बस का टैक्स ही जमा नहीं था। सभी बसों का चालान कर दिया गया है। कार्रवाई के बाद प्राइवेट बसों के संचालकों में हड़कंप मच गया।

तीन तरह की बसों के हैं परमिट

टूरिस्ट बसों को तीन प्रकार के परमिट- ऑल इंडिया, ऑल यूपी और टूरिस्ट परमिट जारी किए गए हैं। टूरिस्ट बसों के संचालक अधिकांशत: अधिक यात्रियों को बैठाकर ही दौड़ लगाते हैं। इससे हादसों की आशंका अधिक रहती है। टूरिस्ट बसों में सिलिंडर से लेकर खाने-पीने का सामान भी भरा होता है। इसकी वजह से हादसे की आशंका इन बसों में अधिक रहती है।

जिले में स्लीपर बसों का पंजीकरण नहीं हैं। यह अन्य जनपदों से संचालित होकर हमारे जिले से होकर गुजर रहीं हैं। कई बार इन बसों पर कार्रवाई की गई है। जिले में 170 बसें सात रूटों पर संचालित हो रहीं हैं, जिनका पंजीकरण कार्यालय से है। करीब सौ बसें ऑल इंडिया, ऑल यूपी व टूरिस्ट परमिट की हैं, जिनका संचालन हो रहा है। टूरिस्ट बसों पर विशेष ध्यान रहता। ओवरलोड होने पर चालान किया जाता है। - अमरीश कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन

स्लीपर बस को चैक करते परिवहन विभाग के अधिकारी। स्रोत-विभाग- फोटो : udhampur news

स्लीपर बस को चैक करते परिवहन विभाग के अधिकारी। स्रोत-विभाग- फोटो : udhampur news

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