अब कैश भरपूर पर निकालने वाले नहीं
नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद साल के आखिरी दिन शनिवार को शहर की सभी बैंक शाखाओं में न तो कैश की कोई कमी थी, न ही खाता धारकों की भीड़ या लंबी लाइनें ही लगीं। नोटबंदी से पहले जैसी स्थिति नजर आई। लोगों को पर्याप्त कैश दिया गया। बैंक शाखाओं में रुटीन की तरह ही काम हुआ।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को बैंकों के हालात का जायजा लिया तो कहीं भी कैश की कमी की की बात सामने नहीं आई। दोपहर एसबीआई की मुख्य शाखा में भी भरपूर कैश उपलब्ध था और भीड़ थी ही नहीं। एचडीएफसी बैंक शाखा में महज तीन लोग लाइन में खड़े थे। बैंक ऑफ बड़ौदा में दो लाइन में आठ से दस लोग खड़े हुए थे। बाकी कुछ लोग सीट पर बैठे विड्रॉल एवं जमा पर्ची भर रहे थे। इलाहाबाद बैंक शाखा में भी महज तीन लोग थे। अधिकांश काउंटर खाली पड़े थे। भीड़ नजर नहीं रही थी और खाताधारकों को 24 हजार रुपये तक कैश वितरित किया गया। दातागंज तिराहा के पास स्थित केनरा बैंक शाखा में दो लोग थे, एक काउंटर पर खड़ा था, जबकि दूसरा सीट पर बैठकर पर्ची भर रहा था। सिंडीकेट बैंक शाखा दो-चार ग्राहक ही कैश जमा करते और निकालते नजर आए। बैंक ऑफ इंडिया में भी शनिवार को भीड़ नजर नहीं आई। यही हाल आईडीबीआई बैंक का रहा। यूनियन बैंक और इंडियन बैंक शाखा दोनों में भीड़ नहीं होने के साथ कैश भी पर्याप्त वितरित किया गया। इंदिरा चौक की यूको बैंक बैंक शाखा में गिनती के ग्राहक नजर आए। वहां आने वाले खाताधारकों को पर्याप्त राशि दी गई। एक्सिस बैंक की शाखा परिसर के अंदर चंद लोग नजर आए। कैश लेने के लिए किसी को परेशानी नहीं हुई। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में भी लाइन और भीड़ बीते दिनों की बात नजर आई। बैंक ऑफ महाराष्ट्र में तो एक ग्राहक ही काउंटर पर खड़ा नजर आया। वहीं, आईसीआईसीआई बैंक में स्थिति सामान्य नजर आई। पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा में 10-12 लोग मौजूद थे, लेकिन कैश की किल्लत नहीं थी। कमोबेश यही हाल पड़ोस में स्थित सर्व यूपी ग्रामीण बैंक का रहा।