फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुम हो गई है शासन से मिली मुआवजे की राशि

Mon, 24 Oct 2016 11:07 PM IST
ब्यूरो/बदायूं
विज्ञापन
sdf
विज्ञापन
दैवीय आपदा से फसल नष्ट होने से डरे किसानों ने फसल बोने के साथ बमुश्किल फसल बीमा की प्रीमियम राशि इस उम्मीद से जमा की थी कि उन्हें फसल बर्बाद होने पर मुआवजा मिलेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसानों की बर्बाद फसल के लिए मुआवजा शासन की ओर से भेजा गया। 6,601 किसानों का करीब 4.16 करोड़ रुपये का मुआवजा कहां है? इसकी खबर किसी को नहीं है। कृषि विभाग में आकर किसान मुआवजे के बारे में पूछ रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी उन्हें बैंक में जाकर पता करने को कहकर टरका दे रहे हैं। 
विज्ञापन

रबी सत्र 2015-16 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हजारों किसानों ने फसलों का बीमा कराया था। दैवीय आपदा के चलते तमाम किसानों का गेहूं बर्बाद हो गया था। इसमें निरीक्षण के बाद 6,601 किसानों को मुआवजा देने का तय किया गया। बीमा कंपनियों ने इन किसानों को दी जाने वाली धनराशि करीब 4.16 करोड़ रुपये सितंबर में ही भेज दिए थे। इसमें किसानों के बैंक खातों में मुआवजे की धनराशि नहीं पहुंची है। इस वजह से किसान लगातार कृषि विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं। इस माह के किसान दिवस में भी कई किसानों ने फसली मुआवजा न देने की शिकायत की थी, लेकिन किसी भी अधिकारी ने किसानों की इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया। दिवाली आ रही है, इस साल रबी की बुवाई भी की जानी है, सो किसानों को पैसे की दरकार है। वह मुआवजा राशि पाने को भटक रहे हैं, लेकिन राहत कहीं से नहीं मिल रही।

फसली मुआवजे की जो धनराशि नोडल बैंकों को प्राप्त हुई है, उसे किसानों के बैंक खातों में भेज दिया गया है, जिन बैंकों से धनराशि नहीं भेजी गई है। इसकी जानकारी करके मंगलवार को कार्यालय पहुंचकर ही दे पाऊंगा।
विज्ञापन

-अनुराग रमन, लीड बैंक मैनेजर

रबी 2015-16 में जिन किसानों ने फसल बीमा कराया था, इसमें 6601 किसानों को मुआवजा के 4.16 करोड़ रुपये मिला है। शासन से धनराशि नोडल बैंकों में भेजे जाने की सूचना एक माह पहले मिल चुकी है, लेकिन किसानों के बैंकों खातों में धनराशि पहुंचने की अब तक सूचना नहीं मिल पाई है, जबकि किसान लगातार मुआवजे के बारे में पूछने के लिए आ रहे हैं। हम खुद जानकारी जुटा रहे हैं।
विज्ञापन

-आरपी चौधरी, उप कृषि निदेशक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें