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सावधान! शहर में खपाया जा रहा मिलावटी दूध

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बदायूं। सावधान! बच्चों को पिलाने और घर में इस्तेमाल होने वाले दूध का इस्तेमाल सावधानी के साथ करें। इसमें डिटर्जेंट हो सकता है। इसके साथ ही दूध में ग्लूकोज की नुकसानदेह मात्रा पाई जा रही है। अप्रैल से नवंबर 2019 तक फेल हुए पेय और खाद्य पदार्थों के नमूनों पर गौर करें तो सबसे ज्यादा नमूने दूध के फेल हुए हैं। दूध के फेल नमूनों का आंकड़ा कुल भरे गए नमूनों का करीब 65 फीसदी है। ऐसे में ‘शक्ति’ देने वाला दूध मिलावट का खेल बनकर रह गया है। इन हालात को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है।
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खाद्य और पेय पदार्थों में मिलावट का धंधा काफी पुराना है। खासकर त्योहारी सीजन में मिलावट का धंधा ज्यादा बढ़ जाया करता है। दूध हर घर की जरूरत है। इसके चलते दूध में मिलावट का धंधा चलता ही रहता है। मिलावटी खाद्य और पेय पदार्थों पर रोक की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की है। जिले भर में अलग-अलग स्थानों से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अप्रैल से नवंबर 2019 तक दूध के 90 सैंपल भरे। इनको जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। जांच में दूध के 65 सेंपल फेल हो गए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दूध के कई नमूनों में डिटर्जेंट, रिफाइंड के साथ ग्लूकोज तक की ज्यादा मात्रा पाई गई है। विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो दूध के नमूनों की स्थिति बद से बदतर है। अक्तूबर 2019 में एफएसएसएआई के दूध गुणवत्ता सर्वे में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। इसके बाद से विभाग ने दूध कारोबारियों पर ज्यादा सख्ती कर दी है।
- खाद्य विभाग हर वित्तीय वर्ष में खाद्य पदार्थों के नमूने भरता है। अप्रैल-19 से नवंबर तक के लिए गए नमूनों में जब 65 नमूने फेल आए तो विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी, जिसके कारण अकेले दिसंबर में ही अब तक जिले भर में दूध के 80 नमूने भरे जा चुके हैं। इनकी भी अगले 15-20 दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। माना जा रहा है कि इनकी रिपोर्ट आने के बाद फेल नमूनों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग यूं तो पूरे जिले में अभियान चलाकर पेय और खाद्य पदार्थों के नमूने भरकर जांच कराता है। इसके साथ इस बात का भी रिकार्ड रखा जाता है कि किस इलाके से कितने नमूने लिए गए और वहां कितने नमूने फेल हुए। इस तरह अगर दूध के नमूनों पर गौर किया जाए तो सबसे ज्यादा स्थिति सहसवान और उझानी में खराब है। डेयरी को सप्लाई किए जाने वाले दूध की क्वालिटी पीने लायक बिल्कुल नहीं पाई गई है। जिला अभिहीत अधिकारी चंद्रशेखर मिश्रा भी इस बात को स्वीकार करते हैं।
बदायूं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन के मुताबिक जिले में रोज करीब 10 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें चार से पांच लाख लीटर दूध मिल्क प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई हो जाता है। शेष लोगों के काम आता है। जिले में दुधारू पशुओं की संख्या चार लाख से ज्यादा है। अनुमान के मुताबिक वर्तमान में दो लाख से ज्यादा पशु दूध दे रहे हैं। गर्मियों के सीजन में दूध का उत्पादन कुछ गिर जाता है।
- मिलावटी दूध किडनी, लीवर को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा इससे तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित होता है। बच्चों के लिए यह ज्यादा घातक होता है। बचपन से ही उनमें यह असाध्य बीमारियां पैदा कर सकता है। दूध में डिटर्जेंट, ज्यादा मात्रा में ग्लूकोज, चिकनाई बढ़ाने के लिए रिफाइंड के साथ यूरिया मिलाने की बातें भी सामने आती हैं। यह सभी चीजें मानक स्वास्थ्य के लिए बेहर खतरनाक हैं। इनका शरीर पर प्रभाव धीरे-धीरे होता है। कई बार यह आंखों की रोशनी पर भी प्रभाव डालते हैं। बच्चों के स्वास्थ्य पर मिलावटी दूध जल्द प्रतिकूल प्रभाव डालता है। मिलावटी दूध से बचने के लिए लोगों को अपने घरों पर दूध की गुणवत्ता चेक करने की परखनली रखनी चाहिए। डिब्बाबंद दूध से जहां तक संभव हो बचना चाहिए। काफी लोग डेयरी से दूध सामने दुलहवा कर लाते हैं। यह ज्यादा बेहतर है।
- डॉ. राजेश वर्मा, एमडी फिजीशियन, जिला अस्पताल
जिले में दूध की गुणवत्ता चिंता का विषय है। हमारी ओर से दूध में मिलावट रोकने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। मिलावटी दूध के ज्यादा मामले उझानी और सहसवान इलाकों में निकल रहे हैं। अप्रैल से नवंबर तक दूध के करीब 65 फीसदी नमूने जांच में फेल हुए हैं। इनमें डिटर्जेंट के साथ ग्लूकोज की ज्यादा मात्रा पाई गई है। दिसंबर में अब तक जिले भर में अभियान चलाकर करीब 80 नमूने भरे जा चुके हैं, जिनकी रिपोर्ट भी जल्द आ जाएगी।
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- चंद्रशेखर मिश्रा, जिला अभिहीत अधिकारी
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