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‘बारिश ने की बर्बादी.....कैसे चुकेगा कर्जा, कैसे होगी बेटी की शादी’

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बदायूं। बिसौली क्षेत्र के किसान रामकिशन ने अपने खेत में इस बार मेंथा की फसल लगाई थी। बेटी 22 साल की हो चुकी है, सोचा था कि इस बार की फसल से होने वाले मुनाफे से बेटी के हाथ पीले कर देंगे, पर बारिश ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। बारिश से उनकी लगभग 60 फीसदी फसल चौपट हो गई। कुछ ऐसा ही हाल नेकसू का है। उन्होंने भी तेल से अपना कर्जा चुकाने की सोच रखी थी, लेकिन बारिश से चौपट फसल होने के कारण अब कर्जा चुकाएं या घर का खर्चा चलाएं, ये सोचकर परेशान में हैं।
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ये तो बानगीभर है, मानसूनी बारिश ने जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ मेंथा की खेती करने वाले किसानों के चेहरे की रंगत ही उड़ गई है। इन किसानों की फसल या तो पेराई के लिए प्लांटों पर पड़ी है या फिर खेतों में पड़ी है। बीते कई दिनों से मानसून अपना पूरा असर दिखा रहा है। जिले के अधिकांश हिस्सों में बारिश का पानी खेतों में भरा हुआ है। चूंकि जिले में बहुत से किसान है, जो अधिक फायदे के कारण मेंथा की फसल को मुख्य फसल मानते हुए लगाते हैं। मानसून की दस्तक से कुछ रोज पहले ही उन किसानों ने मेंथा की कटाई शुरू करा दी थी, लेकिन इस बीच मौसम ने उन पर अपनी मार शुरू कर दी। बड़ी संख्या में मेंथा किसानों ने काटी हुई फसल को या तो अपने खेतों में यूं ही पड़ा रहने दिया या फिर पेराई के लिए मेंथा प्लांट पर डाल दिया, लेकिन कई दिनों तक रुक-रुककर और तेज बारिश ने उस फसल को खराब करना शुरू कर दिया। अब जब धूप पड़ी तो उस कटी हुई फसल से दुर्गंध निकलने लगी। यह स्थिति देखकर किसानों की आंखें भी भर आईं।
शिवालिक की फसल में एक बीघा में दस, स्पियरमेंट में छह से सात और पिपरेटा में पांच किलो तेल निकलता है, लेकिन इस बार बारिश की वजह से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। जो फसल कटी पड़ी है, उसमें तेल न के बराबर निकल रहा है।
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- गजेंद्र सिंह पेटल, मेंथा व्यापारी

तेल का भाव (मंगलवार)
शिवालिक-1320 रुपये प्रति लीटर
स्पियरमेंट-1500 रुपये प्रति लीटर
पिपरेटा- 2300 रुपये प्रति लीटर

बोले किसान-
पांच बीघा में निकला तीन किलो तेल
इस बार पांच बीघा में शिवालिक की फसल बोई थी। फसल काटकर खेत में डाली थी, इसी बीच बारिश शुरू हो गई, जिससे खेतों में पानी भर गया। अब हालात ये हैं पांच बीघा खेत में मात्र तीन किलो ही तेल निकला है।
-राम बहादुर, अहरुइया

कर्ज चढ़ने की आई नौबत
हमारी तो समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। थोड़ी-बहुत जमीन में तीन बीघा मैंथा किया था। सोचा था इससे परिवार का कुछ भला हो जाएगा, लेकिन बारिश की वजह से फसल बर्बाद हो गई। हालात ये है कि लोगों का कर्ज चढ़ने की नौबत आ गई।
-रतनलाल, गंज

बारिश ने धो दिए अरमान
इस बार गर्मी अच्छी पड़ी, इस वजह से फसल बहुत अच्छी हुई थी, लेकिन पता नहीं किसकी नजर लग गई। आखिरी मौके पर हुई बारिश ने सभी अरमानों पर पानी फेर दिया। पांच बीघा में केवल 15 किलो तेल निकला है।
-मुन्ना लाल, फरीदपुर चकोलर

खर्च हुई धनराशि तक नहीं निकली
इस बार बारिश ने मेंथा किसानों को बर्बाद कर दिया। हमारी सात बीघा की फसल में 21 किलो तेल निकला है। अब ऐसे में लागत तक नहीं निकल पाई है। अब परिवार को कैसे चलाएंगे।
-नत्थू लाल, औरंगाबाद खालसा
जिले में कुुल मैंथा का रकबा- 50 हजार हेक्टेयर
शिवलिक- 25 हजार हेक्टेयर (लगभग)
पिपरेटा- 11 हजार हेक्टेयर (लगभग)
स्पियरमेंट- नौ हजार हेक्टेयर (लगभग)
तुलसा- पांच हजार हेक्टेयर (लगभग)
किसान- दो हजार (लगभग)
मैंने अभी हाल फिलहाल में ही ज्वाइनिंग की है। हालांकि यहां पर करीब 50 हजार हेक्टेयर में मेंथा की फसल होती है। हां, बारिश होने की वजह से कुछ मेंथा किसानों को नुकसान हुआ है।
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-मुकेश कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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