बदायूं। यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन दवाओं की सप्लाई में मनमानी कर रहा है। जिन दवाओं के लिए बार-बार डिमांड भेजी जा रही है, उनकी सप्लाई तो नहीं दी जा रही, जबकि बिना डिमांड के जिले को आयरन की 35 लाख गोलियों का आवंटन कर दिया गया। छह महीने पहले ही जिले की मांग से कहीं ज्यादा आयरन की 38 लाख गोलियों की सप्लाई की गई थी। अस्पतालों में आयरन की गोलियों का पहले से ही स्टॉक है।
अब तक सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद रेट कांट्रेक्ट के आधार पर शासन की सूची में शामिल निर्धारित दवा कंपनियों से की जाती थी। अब सरकार द्वारा दवा खरीद के लिए अब यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन का गठन कर दिया गया है। सभी सरकारी दवाओं, चिकित्सा उपकरणों की खरीद अब शासन स्तर से यूपीएमएससी के जरिये शुरू कर दी गई है। शासन की ओर से दवा खरीद के लिए यूपीएमएससी को सीधे बजट मुहैया कराया जा रहा है। जिला अस्पताल समेत सीएचसी, पीएचसी पर एंटी बायोटिक्स के साथ दर्द, खुजली, बच्चों की बीमारियों में काम आने वाली दवाओं की किल्लत बनी हुई है। बार-बार मांग पत्र और रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी कारपोरेशन जिले के जरूरत की दवाइयों की सप्लाई नहीं दे रही, पर आयरन टेबलेट की सप्लाई में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है। यह बात स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के गले भी नहीं उतर रही। छह महीने में दूसरी बार बिना किसी मांग के जिले को 35 लाख आयरन टेबलेट का आवंटन होने के बाद सीएमओ ने टेबलेट लेने से इंकार कर दिया। इसके बावजूद यूपीएमएससी ने सीएमओ बदायूं को आयरन की 15 लाख टेबलेट लेने के लिए लिखा है। खींचतान के बाद सीएमओ ने इस पर हामी भर दी है।
बार-बार डिमांड के बाद भी नहीं मिली इन दवाओं की सप्लाई
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बार-बार एक्सीक्लोफेनिक, डिक्लोफेनिक, बेंजाइल बेंजोएट लोशन, अमोक्सिकलिन, सिप्रोफ्लॉक्सिन जैसी जरूरी दवाओं के लिए डिमांड भेजी जा रही है। इनकी सप्लाई जिले को नहीं की जा रही। इनमें सबसे जरूरी एंटी बायोटिक के साथ दर्द और त्वचा रोग संबंधी दवाएं भी शामिल हैं। इसके साथ ही बच्चों की बीमारियों में काम आने वाली दवाओं की भी किल्लत है। जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र खुलने से लोगों को जरूर राहत मिली है।
मलेरिया का इंजेक्शन, उल्टी की दवा के सेंपल हो चुके फेल
उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन ही पिछले दिनों मलेरिया बुखार में काम आने वाले आर्टीमिथर नाम के 85 हजार इंजेक्शन की जिले को सप्लाई दी थी। मलेरिया के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग यह इंजेक्शन लगाता रहा। जिले में मलेरिया ने सैकड़ों लोगों की जान भी ले दी। बाद में पता लगा कि मलेरिया का इंजेक्शन अधोमानक है। इसके साथ ही उल्टी रोकने में काम आने वाली एक दवा का नमूना भी जांच में फेल हो चुका है। सीएमओ स्तर से इस संबंध में यूपीएमएससी को लिखा भी गया है।
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ऊंचे स्तर पर भ्रष्टाचार का नतीजा मनमानी दवा सप्लाई
स्वास्थ्य विभाग को स्थानीय स्तर पर दवाओं की सप्लाई कर चुके दवा कारोबारी अखिल रस्तोगी का कहना है कि दवाओं की खरीद अब सीधे शासन स्तर पर हो रही है। यह ऊंचे स्तर का भ्रष्टाचार है। इसी के चलते जिले को जरूरी दवाएं समय से नहीं मिल पा रहीं। दरअसल, स्थानीय स्तर पर होने वाली खरीद से नेताओं और अधिकारियों को कमीशन नहीं मिल पाता था। ऐसे में अब सब कुछ शासन स्तर से ही खरीदा जा रहा है। कई दवा कंपनियां कारपोरेशन के अधिकारियों से सांठगांठ कर उनको कमीशन देकर अपनी दवाओं को इसी तरह खपा दिया करती हैं। निष्पक्ष जांच हो तो कई खुलासे हो सकते हैं।
यूपीएमएससी कई बार बिना डिमांड के दवाओं का आवंटन कर रहा है। बिना डिमांड जिले को 35 लाख आयरन टेबलेट का आवंटन कर दिया गया। हम जरूरत के अनुसार की दवाएं ले रहे हैं। अतिरिक्त दवाओं को वापस कर रहे हैं। जिन दवाओं की जरूरत है स्टॉक खत्म होने से पहले उनकी सप्लाई के लिए समय-समय डिमांड भेजी जा रही है।
- डॉ. मंजीत सिंह