यहां बता दें कि जिले में 1,625 मेडिकल स्टोर हैं। इनमें सबसे ज्यादा थोक के लाइसेंस धारक हैं। पंजीकरण में सरल प्रक्रिया होने के कारण और फार्मासिस्ट की जरूरत नहीं पड़ने कारण लोग थोक का मेडिकल लाइसेंस तो बनवा लेते हैं, लेकिन फुटकर बिक्री भी करते हैं। कुछ लोगों ने थोक और रिटेल दोनो प्रकार के लाइसेंस ले रखे हैं। कुछ ऐसे भी मेडिकल स्टोर हैं, जो थोक और रिटेल दो लाइसेंस पर चल रहे हैं। यहां तक ऐसे मेडिकल स्टोर एक ही दुकान में चल रहे हैं। इस प्रकार की सभी खामियों पर उस समय नजर रखी जा सकेगी, जब सभी मेडिकल स्टोर ऑनलाइन हो जाएंगे।
जिले में 1625 मेडिकल स्टोर में से 54 मेडिकल स्टोर इस साल नए लाइसेंस के साथ बढ़ गए हैं। पांच वर्षीय नवीनीकरण में इस वर्ष केवल 59 मेडिकल स्टोर का नवीनीकरण हुआ है। इन सबका रिकार्ड ऑनलाइन होने लगा है। बाकी सभी नए आवेदन ऑनलाइन होंगे। इसके साथ ही मेडिकल स्टोर ऑनलाइन होते चले जाएंगे। ये प्रक्रिया तेज हो चुकी है।
जल्दी ही सभी व्यवस्थाओं को ऑनलाइन किया जाएगा। औषधि प्रशासन ने इन प्रक्रियाओं को शुरू कर दिया है। नए मेडिकल स्टोर को आवेदन के साथ ही नवीनीकरण को भी ऑनलाइन व्यवस्था स्वत: हो जाएगी। हाल के सभी आवेदन ऑनलाइन ही हुए हैं।
- पवन कुमार, डीआई, औषधि प्रशासन