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झोलाछापों के रजिस्ट्रेशन मामले में जांच अधिकारी ने खंगाले रिकार्ड

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बदायूं। चिकित्सा व्यवसाय के लिए झोलाछापों के गलत तरीके से रजिस्ट्रेशन किए जाने के मामले में शासन स्तर से चल रही जांच तेज हो गई है। शासन की ओर से नियुक्त जांच अधिकारी राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय बरेली के प्राचार्य डॉ. डीके मौर्य ने बुधवार को बदायूं पहुंचकर मामले में पड़ताल की। उन्होंने क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दीपक सिंह तोमर के बयान लिए और रिकार्ड खंगाले।
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स्वास्थ्य विभाग में पिछले दिनों झोलाछापों के रजिस्ट्रेशन कर बड़ा खेल किया गया था। दरअसल, जिले में झोलाछापों पर कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दीपक तोमर के स्तर से कई झोलाछापों के रजिस्ट्रेशन कर लिए गए। इससे यह झोलाछाप कार्रवाई से बच गए, साथ ही उनको चिकित्सा व्यवसाय का प्रमाण पत्र भी मिल गया। इस मामले में जांच शासन स्तर से की गई थी। आयुष चिकित्सा अनुभाग-एक ने मामले में संज्ञान लिया और इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए। इसके बाद रजिस्ट्रार आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी तिब्बती चिकित्सा पद्घति बोर्ड ने इस मामले की जांच एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय बरेली के प्राचार्य प्रोफेसर डीके मौर्य को सौंप दी थी। इस पर जांच अधिकारी ने बदायूं पहुंचकर शिकायतकर्ता शेखूपुर निवासी एमजेड अंसारी और डॉ. दीपक सिंह तोमर से अलग-अलग बात की।
बुधवार को जांच अधिकारी जिला अस्पताल परिसर स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने डॉ. दीपक सिंह तोमर के बयान लिए। इसके साथ ही रिकार्ड भी खंगाले। शिकायकर्ता एमजेड अंसारी की ओर से भी जांच अधिकारी को डॉ. दीपक तोमर के खिलाफ साक्ष्य उपलब्ध कराए गए। मामले में डॉ. दीपक सिंह तोमर पहले ही अपनी गलती स्वीकार कर चुके हैं। उनके खिलाफ अब कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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झोलाछापों को चिकित्सा व्यवसाय की अनुमति के लिए रजिस्ट्रेशन किए जाने की शिकायत शासन से की गई थी। शासन स्तर से जांच की जिम्मेदारी मुझे दी गई है। बदायूं के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दीपक सिंह तोमर और संबंधित शिकायतकर्ता से बात की गई है। दोनों पक्ष जानने के बाद रिकार्ड भी देखे हैं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को दी जाएगी।
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- प्रोफेसर डीके मौर्य, प्राचार्य एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, बरेली
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