बदायूं। जिन कर्मचारियों के परिवार सिर्फ वेतन पर निर्भर हों और उन्हें वेतन नहीं मिले, तो शायद उनकी जिंदगी बद से बदतर गुजरेगी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के स्टॉफ को एक नहीं, दो नहीं, पूरे छह माह का वेतन नहीं मिला है। वर्ष 2019 का आधा साल उनके लिए ऐसे ही गुजर गया। कर्मचारी लगातार वेतन की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें वेतन नहीं दिया गया है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के स्टॉफ का साल 2019 बद से बदतर गुजरा है। 2020 की शुरुआत में एक ओर राजकीय मेडिकल कॉलेज में जश्न मनाया गया। ओपीडी से लेकर प्रत्येक वार्ड में गुब्बारे लगाए गए। एक-दूसरे को नई साल की शुभकामनाएं दी गईं। वहीं दूसरी ओर स्टॉफ छह माह से वेतन नहीं मिलने पर मायूसी में डूबा रहा। कर्मचारियों की माने तो जून माह बीतने के बाद वेतन मिलने का समय आ चुका था। पता नहीं क्या हुआ कि कर्मचारियों से कह दिया गया कि अब वेतन जुलाई में मिलेगा। कर्मचारियों ने किसी तरह एक महीना बिता लिया। फिर जैसे-जैसे समय बीतता गया, कर्मचारियों को आश्वासन दिया जाता रहा कि अगले माह वेतन मिलेगा। 2019 का दिसंबर माह निकल चुका है, लेकिन कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। इस समय कर्मचारी इस स्थिति में पहुंच गए हैं कि उन्होंने अपने रिश्तेदार और परिचित किसी को नहीं छोड़ा है। सभी से कुछ न कुछ उधार ले लिया है। कई कर्मचारी हजारों रुपये के कर्जदार हो गए हैं। इनमेें स्टॉफ नर्स, वार्ड ब्वॉय, लिपिक, चालक, सफाई कर्मचारी तक शामिल हैं। इन छह माह के दौरान कर्मचारियों ने कई बार वेतन देने की मांग की, लेकिन उन्हें हर बार आश्वासन ही दिया गया। आज कर्मचारी इस उम्मीद में बैठे हैं कब उन्हें वेतन मिले और वह अपना कर्ज चुकाएं।
हक की आवाज उठाई तो समझो नौकरी खतरे में
-राजकीय मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों के सामने एक और बढ़ी मुसीबत है। कर्मचारियों का कोई अपना संगठन नहीं है। अगर कर्मचारी एकजुट होकर हक के लिए लड़ते हैं तो जो आगे होता है, उसी को रडार पर ले लिया जाता है। उसका नाम ब्लैक लिस्ट में शामिल कर लिया जाता है। उसकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
मेडिकल कॉलेज में तैनात स्टाफ का मानेदय क्यों नहीं आ रहा है। इसको लेकर शासन से वार्ता की जाएगी। उम्मीद करेंगे कि जल्द से जल्द मानदेय मिल जाए।
-डॉ. आरपी चौधरी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज