जानकारियां एकत्रित करने में छूटे कृषि विभाग के पसीने
खेती की सेहत संवारने के लिए कृषि विभाग की ओर से लिए गए मृदा के नमूनों की रिपोर्ट के लिए इंतजार कर रहे उन हजारों किसानों को निराशा मिली है, जिनके मृदा परीक्षण की रिपोर्ट उन तक नहीं पहुंच सकी है, जिससे कि वह धरती मां की सेहत को सुधार सकें। साथ ही करीब नौ हजार किसानों की समस्या और गंभीर है, क्योंकि उन लोगों के खेतों से लिए गए मृदा नमूनों को ही अभी तक मृदा परीक्षण प्रयोशाला नहीं भेजा सका है।
शासन ने मृदा परीक्षण कराने के लिए इस बार नए ग्रिड के हिसाब से करने के निर्देश दिए हैं। इसमें एक निश्चित जमीन के अंतर्गत आने वाले सभी खेतों के मालिकों के नाम और पते के साथ उन खेतों के खसरा और खतौनी भी चाहिए होती है। शासन के आदेश पर कृषि विभाग की टीमों ने खेतों में ग्रिड बनाकर नमूने तो ले लिए, लेकिन उन ग्रिडों के अंतर्गत आने वाले किसानों का खसरा खतौनी एकत्रित करने में पसीने छूट रहे हैं। इससे करीब नौ हजार ग्रिडों के नमूने प्रयोगशालाओं की दहलीज तक नहीं पहुंच सके हैं।
कृषि विभाग की ओर से ग्रिड बनाकर 25,855 मृदा के नमूने लिए गए थे। इसमें जिला स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, तहसील स्तरीय प्रयोगशाला सहित चीनी मिलों की प्रयोगशालाओं में मृदा परीक्षण के लिए नमूने भेजे गए थे। इन प्रयोगशालाओं में करीब 12 हजार से अधिक नमूने भेजे जा चुके हैं। शेष नौ हजार नमूनों को परीक्षण के लिए भेजने से पहले कृषि विभाग के कर्मचारी खसरा खतौनी ढूंढ रहे हैं। इससे यह नमूने हाल फिलहाल में मृदा परीक्षण के लिए पहुंचते नजर नहीं आ रहे हैं।
मृदा परीक्षण में सहयोग करेंगे प्राविधिक सहायक
बदायूं। मृदा रसायन से पढ़ाई करने वाले प्राविधिक सहायकों को तहसील स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में लगाया गया है। जिला स्तरीय प्रयोगशाला में दो, सहसवान, बिसौली और दातागंज में स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में एक-एक प्राविधिक सहायक को लगाया गया। यह लोग मृदा के परीक्षण जल्द कराने में मदद करेंगे।
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शासनादेश के अनुसार ही मृदा परीक्षण के लिए लिए गए नमूनों को भेजा रहा है। संबंधित कर्मचारियों को तेजी के साथ खसरा खतौनी एवं अन्य जरूरी जानकारियां एकत्र करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। मृदा परीक्षण में तेजी से काम करने के लिए सोइल केमेस्ट्री पढ़ाई करने वाले प्राविधिक सहायकों को लगाया गया है।
-आरपी चौधरी, उप निदेशक कृषि