2021 से मलेरिया विभाग ने जांचें दो गुनी कीं, लेकिन मरीज कम होते चले गए। 2023 में विभाग ने 3.72 लाख लोगों की जांचें कीं, जिसमें 3200 मलेरिया के मरीज मिले। इस साल मलेरिया विभाग एक-एक दिन में 20-20 टीमें लगाकर बुखार पीड़ितों की जांच करा रहा है। इन्हीं जांच में एक से 15 अगस्त तक मलेरिया के 400 मरीज सामने आए हैं।
मलेरिया संक्रमित को यह दी जा रही दवा
मलेरिया संक्रमित होने के बाद सरकारी अस्पताल से 14 दिन की दवा दी जाती है। मरीज को घर जाकर आशा चेक करती है कि मरीज दवा सही तरीके से खा रहा है या नहीं। मरीज को समय पर 14 दिन तक दवा खाने की सलाह भी दी जा रही है। बुखार पीड़ित को पीसीएम टेबलेट, क्लोरोक्वीन, प्राइमाक्वीन टेबलेट खानी होती है, जो सरकारी अस्पताल से मुफ्त में दी जा रही है।
मलेरिया अधिकारी डॉ. योगेश कुमार सारस्वत ने बताया कि मलेरिया के मरीजों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें शिविर लगाकर जांच कर रहीं हैं। आशा बहुओं को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वह भी बुखार आने पर मलेरिया की किट से जांच कर सकें। इससे गांव में बुखार की जांचों में वृद्धि हो सकेगी। जिन लोगों को मलेरिया निकल रहा है उन्हें दवा दी जा रही है।