मकर संक्रांति तो 14 जनवरी को लग जाएगी, लेकिन समय काल ऐसा है कि उस समय
दान की उपादेयता नहीं रहेगी। पंडित गिरीश शर्मा ने बताया कि 14 जनवरी को
सूर्यदेव शाम 7.26 बजे मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। जो स्नानादि और दान
पुण्य के लिए शास्त्रोक्त समय नहीं है। 15 जनवरी को पूर्वाह्न 11.23 बजे
तक पुण्यकाल होगा। इसलिए दान-पुण्य का यही समय उचित रहेेगा।
बताया कि
सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही वह दक्षिणायन से उत्तरायण
हो जाते हैं। 14 जनवरी की शाम को ऐसा ही होगा। सूर्यास्त में दानपुण्य न कर
अगर सूर्योदय में दान-पुण्य किया जाए तो फलदायी होता है। गंगा स्नान,
सूर्य पूजन, हवन, दान 14 जनवरी अपराह्न 1.02 बजे से शुरू कर अगले दिन 15
जनवरी 11.23 बजे तक रहेगा। बृहस्पतिवार की सुबह का समय सबसे उत्तम है। पूजन
व्रत आदि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से पूर्व से शुरू हो जाता है।
मकर राशि में आने पर विशेष फलदायी बन जाता है। इस अवसर पर दान-पुण्य का
हजारों गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
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- दक्षिणायन से सूर्यदेव उत्तरायण आते हैं।
- दक्षिणायन में सूर्यदेव पितृलोक में और उत्तरायण में वह देवलोक से परिभ्रमण करते हैं।
- इस अवसर पर शनिदेव अपने पिता सूर्य से मिलते हैं।
- इस दिन सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और सभी जागृत करने वाली रश्मियों के साथ दर्शन देते हैं।
- मकर संक्रांति को ही गंगा का सागर से मिलन हुआ और गंगा-सागर तीर्थ बना।
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राशि के अनुसार दान
- मेष, वृष राशि वाले जातकों का स्वामी मंगल है। ये गुड़, गुड़ की बनी गजक, लाल वस्त्र का दान करें।
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मिथुन, कन्या राशि वालों का स्वामी बुध है। शिक्षा से जुड़ी वस्तुएं,
किताबें, पेन, कापी आदि के अलावा हरी वस्तुओं का दान करें। गाय को हरा चारा
खिलाएं।
- वृष, तुला राशि वालों का स्वामी शुक्र है। सफे द गजक, तिल
मावा के लड्डू, चावल, आटा और सफेद वस्त्र, सुगंधित सफेद तेल का दान करें।
- धनु, मीन राशि का स्वामी बृहस्पति हैं। शैक्षिक और धार्मिक पुस्तकें, पूजन सामग्री और पीली वस्तुओं का दान करें।
- मकर, कुंभ राशि के स्वामी शनि हैं। गजक, उड़द, तेल, तिल के साथ काले वस्त्र, जूता, कंबल आदि का दान करें।
- कर्क राशि के स्वामी चंद्र हैं। दूध, आटा, चावल, सफेद वस्त्र आदि का दान करें।
- सिंह राशि में स्वामी स्वयं ग्रहों के राजा सूर्यदेव हैं। गुड़, गजक, मसूर की दान और लाल वस्त्र के दान का प्रावधान है।