बदायूं/सिलहरी। सांसद संघमित्रा मौर्य द्वारा जब तहसील सदर का गांव मझिया गोद लिया गया तो गांव वालों को काफी उम्मीदें जगी थीं। बुधवार को हमारी टीम मझिया गांव पहुंची तो पाया कि गांव की मुख्य सड़क पांच साल में भी नहीं बन सकी। पथ प्रकाश व्यवस्था भी खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि सांसद के वायदे चुनावी घोषणा की तरह थे, जो पूरे नहीं हुए।
शहर से करीब चार किलोमीटर मझिया गांव है। इसकी आबादी करीब 1900 है। सांसद चुने जाने के बाद संघमित्रा मौर्य ने जब मझिया को गोद लिया तभी वह एक बार गांव पहुंचीं थीं। तब ग्रामीणों के मन में एक ही बात थी कि अब शायद उनके अच्छे दिन आ जाएंगे।
सर्वांगीण विकास का दावा भी सांसद ने गांव को गोद लेने के बाद किया था। ग्रामीणों अनुसार, सांसद दोबारा कभी गांव में नहीं आईं। गांव की मुख्य सड़क इस कदर जर्जर है कि बिना ठोकर खाए कोई भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचता। गांव में रोशनी के लिए खंभों पर जो सोलर लाइट लगी हैं, वह अधिकांश खराब हैं। इसकी वजह से शाम ढलते ही उन सड़कों पर अंधेरा छाया रहता है। पेयजल के लिए जो हैंडपंप लगे हैं वह भी खराब हैं।
कक्षा आठ के बाद छूट जाती हैं अधिकांश बेटियों की पढ़ाई
शिक्षा के लिहाज से इस गांव में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय है। उच्च प्राथमिक विद्यालय से कक्षा आठ तक की पढ़ाई करने के बाद उनको पढ़ाई का अवसर गांव में नहीं मिलता, क्योंकि गांव के आसपास कोई सरकारी हाईस्कूल या इंटर कॉलेज नहीं है। ऐसे में उनको जिला मुख्यालय की राह देखनी होती है। शहर में भीड़-भाड़ अधिक होने की वजह से कई बार लोग बेटियों को गांव के बाहर नहीं भेजते, तो कभी दूरी उनके लिए बाधा बन जाती है। इस कारण अधिकांश लड़कियां कक्षा आठ तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद घर पर ही बैठ जाती हैं।
सूर्य कुंड का भी नहीं हुआ जीर्णोद्धार
गांव में ऐतिहासिक सूर्य कुंड भी है। सपा शासनकाल में सूर्य कुंड के सुंदरीकरण के लिए धनराशि मिली थी। उसे चहारदीवारी के साथ ही कुछ और भी कार्य हुए थे, लेकिन बाद में प्रशासन ने इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। यह ऐतिहासिक स्थल अपना वजूद खो चुका है। गांव के लोगों का कहना है कि सांसद में ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण तो किया पर कोई काम नहीं कराया। यदि सांसद में गंभीरता पूर्वक गांव के पिछड़ेपन को दूर किए जाने का बीड़ा उठाया होता, तो शायद गांव की तस्वीर बदलती।
प्रधानमंत्री आवास योजना में 20 लोगों को चाहिए आवास
मझिया गांव में अब तक 29 लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है, जबकि 20 लोगों को अब भी 20 आवास की जरूरत है। गांव में करीब 70 प्रतिशत लोगों को गैस कनेक्शन मिला है। साथ ही 60 प्रतिशत लोगों को सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन दिया जा चुका है।
फाेटो-
लोग बोले- जब विकास कराना ही नहीं था तो गांव गोद क्यों लिया
सांसद के गांव गोद लिए जाने के बाद उम्मीद जगी थी कि गांव की दशा सुधर जाएंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। विकास के नाम सांसद ने दोबारा गांव में मुड़कर नहीं देखा। -छविराम
फोटो-
गांव में टूटी सड़कें, खराब पेयजल व्यवस्था सांसद की लापरवाही दिखाने के लिए काफी है। अरे, जब विकास कराना ही नहीं था तो गांव गोद क्यों लिया। -राजीव कुमार
राजीव कुमार।
राजीव कुमार।
राजीव कुमार।