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Budaun News: भाजपा से सीट हासिल करने के लिए सपा और बसपा जुटे

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बदायूं। कांग्रेस और सपा के वर्चस्व वाली बदायूं लोकसभा सीट में अबकी बार भाजपा, सपा और बसपा आमने-सामने हैं। भाजपा के सामने जहां सीट बचाए रखने की चुनौती है तो सपा को अपने गढ़ में जीतने की। बसपा भी जीत के लिए जूझ रही है।
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साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा साथ-साथ थे। भाजपा की संघमित्रा मौर्य चुनाव जीती थीं। धर्मेंद्र यादव सपा-बसपा गठबंधन से लड़े थे पर मामूली अंतर से हार गए थे। अब 2024 में सपा और बसपा आमने-सामने हैं। दोनों ही दल भाजपा से सीट हासिल करने के लिए आतुर हैं। तीनों दलों ने नए उम्मीदवार उतारे हैं।
सपा के आदित्य यादव, भाजपा के दुर्विजय सिंह शाक्य और बसपा के मुस्लिम खां पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। नए उम्मीदवार और नए समीकरण बदायूं संसदीय क्षेत्र में सबके सामने हैं। भाजपा की ओर से सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी तो सपा की ओर खुद पूर्व सीएम अखिलेश यादव और बसपा की ओर से मायावती सीधे बदायूं सीट पर नजर रखे हुए हैं। तीनों ही अपने जिलाध्यक्षों और भरोसे के लोगों से फीडबैक लेकर चुनावी रणनीति में लगातार बदलाव कर रहे हैं।
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अतीत: छह बार सपा, पांच बार कांग्रेस, भाजपा और जनसंघ दो दो बार जीते
अगर संसदीय सीट के अतीत पर नजर दौड़ाएं तो लोकसभा क्षेत्र में सबसे अधिक छह बार सपा का कब्जा रहा। चार बार सलीम इकबाल शेरवानी और दोबार धर्मेंद्र यादव सांसद चुने गए। भाजपा का 1991 में खाता खुला। चिन्मयानंद पहले भाजपा सांसद बदायूं में बने। दूसरी भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्य रहीं। इससे पहले 1962 और 1967 में जनसंघ ने जीत दर्ज की। पांच बार कांग्रेस का सांसद चुना गया। जनता दल से 1989 में शरद यादव और इससे पहले 1977 में भारतीय लोकदल के ओमकार सांसद चुने गए।


फिलहाल यह है हाल
भाजपा: चुनावी प्रबंधन में मजबूत है। मौर्य-शाक्य मतों के साथ सवर्णों का झुकाव पार्टी की मजबूती है, पर यादव मुस्लिम मतों की चुनौती भी है। सीएम योगी आदित्यनाथ दौरा करके प्रबुद्ध वर्ग को साध चुके हैं। विपक्षी दलों में सेंधमारी के साथ मोदी की गारंटी देकर मतदाता को भाजपाई लुभा रहे हैं। सांसद संघमित्रा मौर्य का टिकट कटने से पैदा हालात को भाजपा ने मैनेज किया है।
सपा: यादव और मुस्लिम मतों के गठजोड़ के साथ सपा खड़ी है। छह बार सपा जीत चुकी है, तो मजबूत आधार है, लेकिन गैर यादव जातियों के साथ सवर्ण मतदाता को जोड़ना चुनौती भी है। इन जातियों को आकर्षित करने के लिए पार्टी ने उन क्षेत्रों के नेताओं को बदायूं बुलाया है, जहां पहले चरण में चुनाव संपन्न होने जा रहे हैं। शिवपाल यादव यहीं डेरा डाले हैं। अखिलेश यादव भी आएंगे।
बसपा: अधिकतम दो लाख मत हासिल कर चुकी बसपा के लिए अनुसूचित और मुस्लिम का गठबंधन एक बार फिर मजबूती का आधार है पर सर्वण मतदाता और यादव मतदाता बसपा के लिए चुनौती हैं। उम्मीदवार मुस्लिम खां अपने संपर्क के आधार पर मुस्लिम मतों का कितना बंटवारा कर पाते हैं और बसपा अपने परंपरागत मतदाता को कितना सहेज पाती है। इस पर सबकी निगाहें हैं।
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चुनाव का परिणाम 2019
पार्टी जीते मिले मत
भाजपा संघमित्रा मौर्य 5,11,352
सपा धर्मेंद्र यादव 4,92,898
कांग्रेस सलीम इकबाल शेरवानी 51,947
(सपा के धर्मेंद्र यादव 18454 मतों से पीछे रह गए थे)
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