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मुख्य स्नान आज, सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं

Sun, 13 Nov 2016 10:59 PM IST
ब्यूरो/बदायूं
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मुख्य स्नान आज, सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं 
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मेला ककोड़ा का उद्घाटन होने के बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो सका। इतना ही नहीं श्रद्धालु बिना किसी रोक-टोक के गंगा घाट के अलावा पश्चिम में भी स्नान करने पहुंच गए। इतना ही नहीं सोमवार को मुख्य स्नान का पर्व होने के बाद भी सुरक्षा के पूर्ण इंतजाम तक नहीं किए जा सके। अगर यही हालात रहे तो मुख्य स्नान पर स्थिति विकट भी हो सकती है।
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बीते दिनों मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे मंडलायुक्त ने जिला स्तरीय अधिकारियों हर संभव तैयारियां समय से पूर्ण कर लिए जाने के सख्त आदेश दिए थे। लेकिन उनके आदेश भी बेअसर दिखे। घाट पर प्राइवेट नावों ने कब्जा जमाया है। स्नानार्थियों को गंगा के उस पार किराया लेकर उतारना शुरू कर दिया है। इसपर गोताखोरों का भी ध्यान नहीं है। वहीं मुख्य घाट स्नान से 500 मीटर दूर पश्चिम में वीआईपी क्षेत्र में भी भारी संख्या में लोग पहुंचकर स्नान करने लगे हैं।  बैरिकेडिंग, गोताखोर, वॉचटॉवर समेत कोई सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं गंगा में लगी रस्सी के पार करने पर भी कोई रोक नहीं लगा रहा है। इधर, रात में गंगा में जल स्तर बढ़ गया था। लेकिन बाद में स्थिर हो गया। गंगा के जलस्तर के बहाव की गति भी बढ़ी हुई थी। बाढ़ खंड अभियंता गोपाल ने बताया कि इस समय गंगा में 1880 क्यूसेक जलस्तर है। मेला अवधि तक यहीं चलेगा।

गंगा मैया के जयकारों के गूंज उठा तट
महाआरती में जुटे श्रद्धालु, नेपाल से आए पंडितों ने की आरती
मेला ककोड़ा। मिनी कुंभ में गंगा महासभा की ओर से की गई महाआरती में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। गंगा मैया के जयकारों से तट गुंजायमान रहा। 
गत वर्ष की भांति इस बार भी नेपाली मूल के निवासी काशी में शिक्षा प्राप्त पंडित अर्जुन सुवेदी गोकुल प्रसाद भंडारी, कृष्णप्रसाद, हेमंत जोशी ने गंगा की आरती की। गोकुल प्रसाद भंडारी ने बताया कि काशी ज्ञान का केंद्र है। हम लोग सांकृतिक और वैदिक ज्ञान के लिए काशी में शिक्षा ग्रहण करने आए। वहीं सत्यसेन मिश्रा ने 1999 में पहली बार दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती की थी। इसके बाद लोगों मे गंगा आरती में श्रद्धा बढ़ी जो अब देश के कोने कोने में की जाती है। इसका प्रदुर्भाव हरिद्वार से हुआ। आरती के सात चरण होते हैं। इनमें मंगलारती, शृंगार आरती, रास आरती, संध्या आरती, शयन आरती, शास्त्रीय है। आरती में गंगा महासभा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमस्वरूप पाठक, राष्ट्रीय महामंत्री धीरज सक्सेना, जिलाध्यक्ष मुनीष अग्रवाल, जिला महामंत्री घनेंद्र घन, मयूर वैश्य समेत भारी संख्य में श्रद्धालु जुटे रहे। 
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स्काउट के बच्चों ने की साफ सफाई
मेला ककोड़ा। सफाई व्यवस्था भी बेपटरी है। वहीं स्काउट के बच्चे सफाई अभियान में जुटे हैं। रविवार को भी बच्चों ने साफ-सफाई की। लोगों ने बच्चों की सराहना भी की।

गंगा तट पर सौंधी खिचड़ी की खुश्बू महकी
मेला ककोड़ा। गंगा तट पर संतों ने सुबह से ही मेले के वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
मधुसूदनाचार्य, शांतिकुंज, आर्यसमाज समेत अन्य पांडालों में सुबह से ही यज्ञ, प्रवचन, भंडारा, संकीर्तन आदि धार्मिक आयोजन किए गए। वहीं सौंधी खिचड़ी की खुश्बू से मेला महका रहा।

मयूर नृत्य पेश कर बांधा समां
मेला ककोड़ा। भले ही मेले में गत वर्ष की तरह रौनक न दिख रही हो, लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बहार जरूर रही। सांस्कृतिक पंडाल में ब्रज के कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुति देकर समां बांधा। डॉ. सीमा मोरवाल, वादक अंकुर तिवारी, टीटू गिरधर, गोपाल, सुशील, ज्योति, कामिनी ने भी मंच पर अपनी प्रस्तुति से भव्यता प्रदान की। रासलीला, कठपुतली, जादूगर के कार्यक्रम देख भी लोगों ने आनंद लिया।

ओपीडी में 450 मरीजों को देखा, एक रेफर
मेला ककोड़ा। मेले में स्थापित चिकित्सालय की ओपीडी में दिखाने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। 450 मरीजों ने दिखाया। वहीं चोट लगने से घायल हुए विकास नाम के युवक को जिला मुख्यालय रेफर कर दिया गया। सबसे ज्यादा मरीजों की संख्या होम्योपैथी कैंप में देखने को मिल रही है।

गंगा को स्वच्छ रखने के लिए किया जागरूक
मेला ककोड़ा। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में निर्मल गंगा जन अभियान के अंतर्गत गायत्री परिजनों और प्रज्ञा मंडल के सदस्यों ने गायत्री महायज्ञ किया। लोक कल्याण के लिए गायत्री मंत्र और महामृत्युंय मंत्र की विशेष आहुतियां यज्ञ भगवान को समर्पित की। इसके बाद पतित पावनी मां गंगा के तट पर सफाई अभियान चला।
गायत्री शक्तिपीठ के बी ज्ञानेंद्र के निर्देशन में चल रहे मां गंगा को स्वच्छ बनाने वाले इस अभियान चलाया गया। निर्मल गंगा जन अभियान के जिला संयोजक सुखपाल शर्मा ने राष्ट्रध्वज फहराया और कहा कि मां गंगा के हरे-भरे आंचल को उद्योगों के जल-मल और शहरों के नाले के गंदा पानी से प्रदूषित कर स्वयं अपने विनाश को आमंत्रण दे रहे हैं। बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन का स्तर सामान्य तीन अंश से दोगुना बढ़कर छह अंश हो गया है। अनेक बीमारियों का कारण प्रदूषित जल है। सहसंयोजक रघुनाथ सिंह व संजीव कुमार शर्मा ने भी विचार रखे।
इससे पूर्व गायत्री परिजनों ने प्रात: मेला ककोड़ा में प्रभात फेरी निकालकर लोगों को मां गंगा में श्रद्धा रखने और स्वच्छ बनाने के प्रति जागरूक किया। इधर, जिला पंचायत अध्यक्ष मधुचंद्रा ने मां गंगा का पूजन किया। 

तीन खोए बच्चों को माता-पिता से मिलाया
मेला ककोड़ा। मेला ककोड़ा में स्काउट बच्चों ने अपने साहस का परिचय देते हुए तीन खोए बच्चों को उनके माता पिता से मिलाया। श्री दाताराम मैमोरियल इंटर कॉलेज, ललुआनगला, असरासी और उच्च प्राथमिक विद्यालय गंगपुर पुख्ता स्काउट ने वाहबाही लूटी। इस मौके पर महेशचंद्र सक्सेना, प्रवेश कुमार सिंह राठौर, कृपाल सिंह, असरार, नंदराम शाक्य, प्रवीण कुमार, माधव सिंह, शिवोहम ने सराहनीय कार्य किया।

जन जीवन का जलीय स्त्रोत मां गंगा
मेला ककोड़ा। श्री प्रभु प्रेम परिसर हरिद्वार के तत्वावधान में गंगा तट पर तीन दिवसीय गंगा कथा का समापन हो गया। कथा शिरोमणि आचार्य अंबरीश महाराज ने कहा कि जन जीवन का जलीय स्त्रोत भगवती मां गंगा ही है। उन्होंने कहा मां गंगा श्री कृष्ण के चरणों में छिप गई और संपूर्ण जगत में जल का अभाव हो गया। समस्त देवताओं की प्रार्थना पर गंगा मैया ने हरि भगवान के साथ विवाह संपन्न करके अपनी एक कला निराकार रूप से पृथ्वी पर रहना स्वीकार किया। गंगा से ही संस्कृति और देश की पहचान है। ब्रह्मस्वरूप महाराज ने सभी समाज सेवी संगठन और धार्मिक संस्थाओं और भक्त जनों से गंगा को स्वच्छ बनानें का आह्वान किया। गंगा के जल में औषधीय और देवीयगुणों की गरिमा को बनाना हम सबका धर्म है। इस मौके पर कथा के संयोजक राजेंद्र गुप्ता, मुख्य यजमान रमेशचंद्र गुप्ता, मनोज कुमार, डॉ. वीरेंद्र गुप्ता, रामनिवास, पारस, हर्षवर्धन, विकास गुप्ता, अरविंद आदि मौजूद रहे।
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