बदायूं। देवों के देव महादेव शंकर को भोले बाबा यूूं ही नहीं कहा जाता। वह जिस पर अपनी कृपा बरसाते हैं तो वह हर परेशानी और बंधन से मुक्त हो जाता है। बस, इसके लिए निस्वार्थ भक्ति जरूरी है। इसी भक्तिभाव में बंधे भगवान भोले के भक्त शुक्रवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवालयों में जुटे और जलाभिषेक कर बाबा से मनौतियां मांगी। मंदिरों में भक्तों के बम-बम भोले के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। शहर के मंदिरों में जलाभिषेक के लिए लगी हजारों भक्तों की भीड़ इसका प्रमाण बनी। बाबा की भक्ति से बढ़कर कुछ दूसरा नहीं है। शहर में प्रमुख बिरुआवड़ी मंदिर पहुंचे शिव भक्तों ने घंटों लाइन में लगकर अपनी बारी आने का इंतजार किया।
महाशिवरात्रि पर शुक्रवार को तड़के से ही शहर के बिरुआबाड़ी मंदिर, हरप्रसाद मंदिर, गौरीशंकर मंदिर, शिव मंदिर, रघुनाथ मंदिर में श्रद्घालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। सुबह होने तक यहां लंबी लाइनें लग गईं। बिरुआबाड़ी मंदिर और गौरीशंकर मंदिर में तो सैकड़ों श्रद्घालु धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। सुबह शुरू हुआ जलाभिषेक का सिलसिला दोपहर बाद तक चलता रहा और भक्तों ने बम-बम भोले के उद्घोष के साथ भगवान शिव का पूजन किया। शाम को भी मंदिरों में दर्शन करने वालों की भीड़ देखी गई।
मंदिरों के बाहर बिकी पूजन सामग्री
शिव की उपासना में बेर, बेलपत्र, धतूरा आदि का अपना अलग ही महत्व है। इनके बिना भगवान शंकर की पूजा अधूरी मानी जाती है। ऐसे में मंदिरों के बाहर इनकी दुकानें सजी रहीं। तमाम लोग ठेले भी लगाकर खड़े रहे, जहां भक्तों ने अपनी श्रद्घानुसार पूजन सामग्री खरीदी और भगवान शिव को अर्पित की।
बेरिकेडिंग होने से नहीं हुई परेशानी
महाशिवरात्रि पर वैसे तो हर मंदिर में श्रद्घालुओं का जाना रहता है लेकिन बिरुआबाड़ी मंदिर और मंडी समिति के निकट स्थित गौरीशंकर मंदिर पर खासी भीड़ जुटती है। इसी कारण इन मंदिरों पर एक दिन पहले से ही बेरिकेडिंग की व्यवस्था की जाती है ताकि श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ने पर कोई अव्यवस्था न फैले और वे आसानी से पूजा कर सकें। इस बार भी बेरिकेडिंग से श्रद्घालुओं को परेशानी नहीं हुई।