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नवादा मधुकर में अब बाढ़ नहीं बरपा पाएगी कहर

Thu, 18 Jun 2015 06:39 PM IST
Dataganj
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पांच साल पहले नवादा मधुकर गांव से रामगंगा की दूरी तीन किमी से भी ज्यादा थी। कटान करते-करते पिछले साल रामगंगा ने गांव में ही प्रवेश कर लिया। अनेक लोग बेघर हो गए। कृषि भूमि को लगभग पूरे गांव की ही नदी में समा चुकी है। हर साल बाढ़ से होने वाली तबाही को लेकर गांव के लोग बरसात को मौसम आने से पहले ही चिंता के सागर में डूब जाते, लेकिन अब नवादा मधुकर के लोगों को शायद राहत मिल जाएगी। बचे खुचे मकान शायद अब नदी के प्रकोप से बच जाएंगे। यह वातावरण गांव के ही एक युवक के प्रयास से बना है।
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पिछले साल नवादा मधुकर गांव पर रामगंगा का प्रकोप ज्यादा रहा था। किसानों की रोजी-रोटी कृषि भूमि के अलावा उनके मकान भी नदी में समा गए थे। बीस मकान कटने की पुष्टि तो प्रशासन ने ही की थी। अन्य कई लोगों ने मकान कटने की आशंका के मद्देनजर अपने आशियाने खुद ही ढहा कर उनकी ईटें दरवाजे आदि निकाल लिए। एक बार ही तो ऐसा लग रहा था जैसे गांव का अस्तित्व ही मिट जाएगा। मंडल स्तर से लेकर लखनऊ तक के बाढ़ खंड के अधिकारियों ने गांव के दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था, लेकिन गांव को बचाने की कोई युक्ति नजर नहीं आई। क्योंकि उस समय बाढ़ अपने पूरे यौवन पर थी। अचानक ही बाढ़ का प्रकोप घटने से बाकी गांव कटने से बच गया। गांव बचाने की मुहिम में बहुराष्ट्रीय मीडिया कंपनी (दिल्ली) में कार्यरत इसी गांव के युवक कौशल कुमार तोमर ने अथक प्रयास करके स्पेशल कंडीशन में गांव को बचाने की परियोजना को स्वीकृत कराया। इसके लिए छह करोड़ 84 लाख 85 हजार की धनराशि स्वीकृत हुई है।

तीन करोड़ की धनराशि आहरित
ग्राम प्रधान अशोक कुमार तोमर ने बताया कि इस परियोजना की पहली किश्त के रूप में तीन करोड़ की राशि आहरित हो चुकी है। इसकी सूचना शासन से उन्हें मिल चुकी है। गांव में बाढ़ खंड ने काम भी शुरु कर दिया है। मशीनें आदि लग गईं हैं। बरसात का मौसम को देखते हुए दिन और रात ठोकरें आदि बनाने का काम चलेगा।
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प्रमुख सचिव की रही अहम भूमिका: कौशल
कौशल कुमार तोमर के मुताबिक इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने में सर्वाधिक मदद सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव दीपक सिंघल की रही है। उन्होंने ही आकस्मिक परिस्थितियों के मद्देनजर यह धनराशि तत्काल स्वीकृत कराई। उन्हीं के निर्देश पर युद्ध स्तर पर कार्य भी चलेगा।

गांव के लोगों में है उत्साह
बाढ़ से होने वाली तबाही को रोकने के लिए कार्य के शुरू हो जाने के बाद से गांव के लोगों में भी बेहद उत्साह है। लोगों का कहना है कि उनके आशियाने अब बचे रहेंगे। उन्हें खानाबदोश का जीवन नहीं व्यतीत करना पड़ेगा। हर साल उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता था।
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