करीब तीन दशक पहले स्थापित जिले की इकलौती शेखूपुर चीनी मिल का घाटा कम होने का नाम नहीं ले रहा। मिल की मशीनें जवाब दे चुकी हैं। चालू पेराई सत्र के एक महीने में मिल को करीब 2.67 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। शेखूपुर मिल की गन्ना पेराई क्षमता सिर्फ 12500 क्विंटल है। गन्ना पेराई पर रिकवरी भी काफी कम है। इसके चलते मिल लगातार घाटे में जा रही है।
शेखूपुर चीनी मिल का पेराई सत्र 22 दिसंबर को चालू हुआ था। एक महीने में मिल ने करीब 3.42 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई की। इससे करीब 23000 बोरा चीनी उत्पादन हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि खरीदे गए गन्ने का मूल्य करीब 9.57 करोड़ रुपये है, जबकि उत्पादित चीनी का बाजार मूल्य करीब 6.90 करोड़ रुपये। इस तरह मिल को एक महीने में 2.67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मिल के सैकड़ों कर्मचारियों और दैनिक वेतनभोगियों के वेतन को भी अगर जोड़ा जाए तो नुकसान तीन करोड़ रुपये से ज्यादा बैठता है।
प्रस्तावित है मिल का विस्तारीकरण
बदायूं। शेखूपुर चीनी मिल का विस्तारीकरण तो प्रस्तावित है। इसके लिए कई बार सर्वे भी हो चुके हैं, लेकिन राजनीतिक स्तर से ठोस पैरवी न होने की वजह से मिल का विस्तारीकरण लटका हुआ है। मिल के विस्तारीकरण से इसकी पेराई क्षमता बढ़ने के साथ गन्ना पेराई रिकवरी में भी इजाफा होगा। उम्मीद है कि इसके बाद दम तोड़ रही शेखूपुर मिल को कुछ राहत मिलेगी। बाद में पहिया धीरे-धीरे पटरी पर आ जाएगा।
तकनीकी खराबी से तीन घंटा बंद रही पेराई
बदायूं। शनिवार शाम मिल के एक नंबर रोलर में तकनीकी खराबी आ गई। इसे ठीक करने में तीन घंटे का वक्त लगा। इस दौरान मिल में पेराई बंद रही। चालू पेराई सत्र में तकनीकी खराबी की वजह से मिल को पांच बार बंद किया जा चुका है। जर्जर मशीनरी के कारण अक्सर तकनीकी खराबी आती रहती हैं।
मिल पूरी क्षमता से चल रही है। मशीनरी पुरानी होने की वजह से कई बार तकनीकी खराबी आ जाती है। पेराई क्षमता और गन्ना पेराई पर रिकवरी भी कम है। इस वजह से मिल को नुकसान हो रहा है। -ज्ञान सिंह यादव, सीसीओ