वेतन समेत अपने विभिन्न देयकों की लड़ाई मेें अपने कर्मचारी साथियों के साथ खड़े कर्मचारी लक्ष्मण 74वें दिन की लड़ाई में हार गए। धरना पर बीमार लक्ष्मण की बरेली इलाज के दौरान मौत हो गई। हालांकि जिला अस्पताल में छह दिन उन्होंने मौत से भी संघर्ष किया। जीते जी तो उन्हें भुगतान नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद तमाम प्रशासनिक अधिकारी और मिल के जीएम पहुंच गए। तत्काल 3.12 लाख का चेक उसके पुत्र को दे दिया गया।
दरअसल, कर्मचारी लक्ष्मण की मौत बरेली में हुई थी। बरेली से उनकी लाश धरना स्थल मालवीय आवास पर लाई गई। कर्मचारी अगले दिन लाश को लेकर प्रदर्शन करने वाले थे। भनक लगते ही सिटी मजिस्ट्रेट विजय बहादुर, एसडीएम सदर प्रदीप यादव, सीओ सिटी राजेंद्र सिंह धामा, एसओ सिविल लाइंस अजय यादव आदि पहुंच गए। शेखूपुर चीनी मिल के जीएम राजीव जेन को भी डीएम ने मौके पर भेजा। जीएम को यहां कर्मचारियों की काफी सुननी पड़ी।
सवा तीन लाख का किया गया भुगतान
अधिकारियों के समझाने-बुझाने पर और कर्मचारी नेता डॉ. मुन्ना लाल के हस्तक्षेप पर फौरी हिसाब बनाकर कर्मचारी के पुत्र को 3.12 हजार का चेक बनाकर दे दिया गया। डीएम की ओर से भी 25 हजार रुपये दिए गए। यह बेहद भावुक क्षण थे। बीती रात करीब 2.30 बजे तक यह तमाशा चला। बाकी धनराशि भी अगले दिन दिए जाने का जीएम ने वायदा किया। कर्मचारी की दुखद मौत पर मिल में शोकावकाश भी रहा। सुबह को कर्मचारी की लाश गांव में पहुंची। वहां भी मातमी माहौल रहा।
पुत्र को नौकरी देने का भी मिला भरोसा
मृतक कर्मचारी के पुत्र हरपाल ले बताया कि पिता के जीते जी उनका पैसा मिलता तो अलग बात थी। प्रशासन और मिल प्रबंधन ने उनकी मौत पर धन दिया है। उसने कहा कि पिता के बदले मिल में नौकरी का भी उसे आश्वासन मिला है लेकिन मिल प्रबंधन पर उसे भरोसा नहीं है।
कर्मचारियों का आंदोलन और होगा तेज
मालवीय आवास पर 75वें दिन भी कर्मचारियों ने धरना दिया। इधर, मिल कैंपस में कर्मचारी ट्रेड यूनियन के बैनर तले मो. असरार अहमद और रवींद्र पाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। नेताओं ने कहा कि आंदोलन को ओर तेज किया जाएगा। एक कर्मचारी ने बलिदान कर दिया और भी कर्मचारी बलिदान कर सकते हैं लेकिन आंदोलन जारी रखेंगे। मालवीय आवास पर कर्मचारी नेता डॉ. मुन्ना लाल ने कहा है कि कर्मचारी अब किसी दशा में झुकने वाले नहीं जल्दी ही आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।