वन विभाग की भूमि पर जब लोगों ने लोहिया आवास बनाने शुरू किए हैं, तो विभाग की तंद्रा टूटी है। विभागीय अधिकारी अब इस भूमि पर आवास बनाने से मना कर रहे हैं, जबकि क्षेत्र में वन विभाग की सैकड़ों एकड़ भूमि पर दो दशक से कब्जा है।
गांव भूड़ा भदरौल में वन विभाग की भूमि पर दो दशक से भी पहले से लोग कब्जा किए हैं। लोगों ने अपने पक्के आवास और पशुशाला भी बना ली हैं। जन सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना पर वन विभाग ने 12 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर कब्जा होना स्वीकारा था, लेकिन इसको भी मुक्त कराने के प्रयास नहीं हुए।
बताते चलें कि 2012 में वन क्षेत्र से कब्जा मुक्त कराने गई टीम पर जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसका मुकदमा लिखा गया। राजनीतिक दबाव में पुलिस ने भी हमला करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की। अब उसी अतिक्रमण वाली भूमि पर लोहिया आवास बनने लगे तब विभाग ने विरोध किया। जबकि निजी आवासों से वन भूमि आज भी घिरी है। इसको मुक्त कराने के प्रयास नहीं हो रहे। लोगों का कहना है कि जब इनको मुक्त नहीं कराया जा रहा तो लोहिया आवास के निर्माण का विरोध क्यों किया जा रहा है।