बदायूं। लॉकडाउन ने लाखों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी के सामने मजदूरों की संकट पैदा कर दिया। बुरे वक्त में उन्हें कहीं ठिकाना न मिला। भूखे पेट किसी तरह वे घर तो लौट रहे हैं। लेकिन आगे क्या होगा। कुछ पता नहीं। हरियाणा से बुलाए गए मजदूरों को शहर में बाईपास स्थित आसरा आवास में क्वारंटीन किया गया है। यहां डेढ़ सौ से ज्यादा मजदूर क्वारंटीन हैं। इन सबकी अलग कहानी है। कोई कई सालों से वहां रह रहा था, तो कोई होली के बाद घर से गया था। कुछ को तो तीन चार दिन पहले ही गए थे। इन मजदूरों ने अमर उजाला को बताई आपबीती।
होली के बाद गए थे, दो दिन काम किया, घर लौटने को ढाई सौ किमी पैदल चले
इस्लामनगर के पपसरा के रहने वाले ओमपाल सिरसा में बिजलीघर पर मजदूरी करते थे। वहां होली के बाद गए थे। कुछ दिन ही काम कर पाए होंगे कि लॉकडाउन हो गया। काम छिना तो रोटी तक के लाल पड़ गए। करीब ढाई सौ किमी पैदल चलकर सोनीपत पहुंचे। वहां पहुंचने में छह-सात दिन लग गए। इसके बाद सरकार की मदद से बस में बदायूं लौटे। वह कहते हैं कि अब काम छिन गया है। पहले घर जाने की चिंता है। उसके बाद सोचेंगे कि क्या करना है।
आगे क्या करेंगे अभी कुछ पता नहीं
बिसौली के पिंदारा गांव निवासी धीर सिंह करनाल में पेंट का काम करते थे। प्रति दिन चार-पांच सौ की दिहाड़ी मिलती थी। वह छह माह पहले ही गए थे। रोजा काम भी नहीं मिलता था, लेकिन ठीक ठाक कमाई हो जाती थी। मगर लॉकडाउन से काम ठप हुआ तो खाने तक के लाले पड़ गए। मुसीबतें झेलकर गांव तक पहुंचे। अब देखना है कि घर कब तक पहुंचेंगे। वह कहते हैं कि पहले हरियाणा में 28 दिन क्वारंटीन रहना पड़ा, अब यहां क्वारंटी हैं। आगे क्या करेंगे अभी कुछ पता नहीं।
नवीं कक्षा की परीक्षा देने बाद गया था वेदप्रकाश
पिंदारा गांव निवासी वेदप्रकाश ने कक्षा नौ के पेपर दिए थे। सोचा था जब तक पढ़ाई शुरू होगी तब तक बाहर जाकर कुछ पैसे कमा लेंगे। यही सोचकर होली के बाद हरियाणा चला गया। वहां दो-तीन दिन पेंट का काम किया होगा कि लॉकडाउन लग गया। काम बंद हो गया। तीन दिन में जो कमाई हुई खाने पीने में खर्च हो गई। फिर भूखे रहने की नौवत आ गई। मुसीबत झेलकर गांव लौट पाए। अब यहां रोक लिया गया। घर कब पहुंचेंगे अभी पता नहीं। उसके बाद क्या होगा, यही चिंता सता रही है।
12 हजार रुपये महीने होती थी कमाई, अब हुए बेरोजगार
बिसौली के खजुरिया गांव निवासी वीरपाल पठानकोट में रेहड़ी लगाते थे। वह वहां दो साल से काम कर रहे है। लॉकडाउन लगा तो 29 मार्च को वहां से पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। पहले पैदल चलते रहे। रास्ते में सवारी मिली तो गुन्नौर तक पहुंच गए। वहां से चलने के बाद गांव तक पहुंचे। वीरपाल कहते हैं कि वहां 11-12 हजार रुपये महीने में कमा लेते थे, लेकिन अब क्या करेंगे? रोजगार छिन गया है, इससे उबरने में काफी समय लग जाएगा। फिलहाल तो घर पहुंचने की चिंता है।
पांच सौ रुपये मिलती थी दिहाड़ी
धर्मपुर के पुष्पेंद्र चरखी दादरी में ठेके पर सरसों काटने का काम करते थे। पांच सौ रुपये दिहाड़ी मिल जाती थी। लॉकडाउन लगा तो काम बंद हो गया। 29 मार्च को वहां से पैदल चलकर झज्जर पहुंचे। वहां पुलिस ने पकड़ लिया और फिर दादरी पहुंचा दिया। सरकार का फरमान आया तो वहां से बस में बैठकर बदायूं तक पहुंच गए। मगर रास्ते में बहुत परेशानी हुई है। वह कहते हैं कि रोजगार तो छिन गया, दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ गए हैं। सोचकर परेशान हैं कि आगे कैसे और क्या करेंगे?
परसेरा के रग्घू यादव चरखी दादरी में पिछले 11 साल से रह रहे थे। वहां इंटरलॉकिंग की सड़क बनाने का काम करते थे। 21 मार्च से काम बंद हो गया था। दो रात एक दिन पैदल चले। फिर रास्ते में पुलिस ने रोक लिया। वहां करीब एक महीने क्वारंटीन रखा गया। अब यहां लाकर रख दिया गया है। कहते हैं कि इतना पुराना रोजगार इस कोरोना ने छीन लिया है। केवल रोजगार ही नहीं छिना, उनका और उनके साथ के 14-15 लोगों के 60-70 हजार रुपये भी ठेकेदार पर फंस गए।
प्रशासन मुहैया करा रहा खाना
लॉकडाउन की वजह से अभी जनपद में अन्य राज्यों से लोगों का आना जारी है। इन सभी को जिला प्रशासन के निर्देश पर घर भेजने से पहले 14 दिन क्वारंटीन किया जा रहा हैं। शहर के आसरा आवास में डेढ़ सौ के करीब लोगों को यहां पर रोका गया हैं। वहीं प्राइवेट बस स्टैंड के पीछे बने शेल्टर होम में भी दो दर्जन से अधिक लोग को क्वारंटीन किया गया है। हालांकि शेल्टर होम में क्वारंटीन किए गए लोगों के अलावा शहर के अंदर रहने वाले ऐसे लोग जो मजदूर हैं, उन्हें भी खाना मुहैया कराया जा रहा है। आसारा आवास में आने वाले लोगों का कहना है कि यहां खाना तो मिल रहा है लेकिन साबुन, मंजन आदि उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। वहीं कुछ मजदूरों की मांग थी कि उन्हें सुबह की चाय व नाश्ता भी उपलब्ध कराया जाए।
हरियाणा से आए मजदूरों में एक तबीयत खराब होने की वजह से उसे जिला अस्पताल भेजा गया था। अब उसकी तबीयत ठीक है। इससे आसरा आवास में लौट आया है। सभी मजदूरों के लिए दोनों टाइम का खाना दिया जा रहा है। साबुन आदि भी मुहैया कराया गया है। कोशिश की जा रही है कि इन्हें कोई परेशानी न होने पाए। - रामनयन, तहसीलदार सदर