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..अब राहत की भी टूट रही आस

Sat, 11 Apr 2015 11:55 PM IST
badaun
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बरसात और ओलावृष्टि से नष्ट खेती पर आंसू बहाने के अलावा किसानों के पास कुछ नहीं बचा है, जिन किसानों को राहत की उम्मीद थी, अब वह भी खत्म होती दिख रही है। एक गांव तो ऐसा है, जहां लेखपाल अब तक नहीं पहुंचा। कर्ज से दबे किसानों को मौसम की मार विचलित किए हुए है। अधिकारी राहत राशि दिलाए जाने की बात करते हैं, लेकिन किसान कहते हैं कि उनकी सुनवाई तक नहीं हो रही है।
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गांव बीधानगला का मजरा डेरा बीघा
डेरा नाम का छोटा सा गांव अरिल नदी के किनारे बसा है। बाहर से आकर बसे सिख समुदाय के इन किसानों के पास चार-पांच बीघा से अधिक खेती नहीं है। सभी ने रबी में गेहूं की फसल की थी। मौसम बैरी ने सभी की फसल निगल ली। किसी का राहत की सूची के लिए नाम लिखना तो दूर की बात है। इस गांव में तो लेखपाल तक नहीं पहुंचा है।
मुरादाबाद के बिलारी कस्बा के समीप गांव बिचौली ढोकी निवासी 8-10 सिख परिवार 1998 में आकर गांव बीधानगला के मजरा डेरा बीघा में बस गए। इस मजरा में आने-जाने तक का रास्ता नहीं है। बिजली की रोशनी के तो गांव के लोगों ने दर्शन तक नहीं किए हैं। गांव की 80 वर्ष की उर्मिला विधवा नत्थू को विधवा पेंशन तक नहीं मिलती।
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किसान राकेश के सामने बड़ी समस्या है। 27 अप्रैल को उसकी बेटी रिंकी की शादी है। खेत की फसल चौपट हो चुकी है। पूर्व में 20 हजार रुपये का कर्ज भूमि विकास बैंक से लिया था। आज तक उन्हें चुकता नहीं कर सका। अब यह रकम दोगुनी हो चुकी है। शादी के मौके पर ही बैंक वालों के फोन आ रहे हैं कि बैंक की रकम जमा करे। इससे वह विचलित है। क्या करे, क्या न करे? बेहद परेशान है। बेटी की शादी के लिए अनुदान पाने को आवेदन किया था, लेकिन बताया गया शादी अनुदान को कोई बजट नहीं रहा है। यही हाल गांव के किसान रामदास, सामसरन, राजेंद्र सिंह और खानचंद आदि का है।
गांव ततारपुर
गांव ततारपुर के किसान कुंवरपाल की छह बीघा खेत में गेहूं की फसल थी। बरसात और तेज हवा से फसल गिर गई थी। शुक्रवार को उसने गहाई की, तो गेहूं का दाना काला निकला और बेहद पतला था। खेत में कुल चार क्विंटल गेहूं ही हाथ लगे जो लागत के हिसाब से भी नहीं हैं। इस किसान के दो बेटियां शादी है। शंकरलाल के 20 बीघा गेहूं नष्ट हुए। उनको दुख है कि केवल 2700 रुपये राहत के नाम पर दिए गए हैं। उनका एक खाता जीरो बैलेंस पर है। राहत का चेक जमा करने सर्व यूपी ग्रामीण बैंक गए, तो बैंक कर्मचारियों ने यह कहकर लौटा दिया कि एक हजार रुपये जमा करें, तो खाता चालू हो सकेगा। बद्री प्रसाद का कहना है कि अभी तक उनको कोई राहत नहीं मिली है। गांव में तमाम किसानों की फसलें तबाह हो चुकी हैं, लेकिन राहत नहीं मिली है। किसान राहत की आस लगाए हुए हैं।

राहत की और राशि जल्दी ही उनकी तहसील को मिलने वाली है। जिन गांवों में लेखपाल नहीं पहुंचा है। उन गांवों में लेखपाल भेजकर राहत प्रदान कराई जाएगी। जल्दी ही सभी किसानों को राहत मिलेगी।  -गुलाब चंद, एसडीएम बिसौली
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