बदमाश कल्लू यादव का शव कई घंटे मुखाग्नि के लिए इंतजार करता रहा। उसका बड़ा भाई शिशुपाल भी अंत्येष्टि स्थल नहीं पहुंचा। काफी देर के बाद कल्लू यादव के शव को उसके खानदान के चचेरे भतीजे ने मुखाग्नि दी। कल्लू यादव को देखने के लिए आसपास के गांवों के लोग भी उमड़े। सुरक्षा के लिहाज से सीओ दातागंज और इंस्पेक्टर फोर्स के साथ मौजूद रहे।
दातागंज के पैरहा गांव निवासी कल्लू यादव 22 जून को बिनावर थाने के गांव घट बहेटी में पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गया था। मुठभेड़ में दरोगा सर्वेश यादव भी शहीद हुए थे। कल्लू यादव के साथी नन्हे और ऋषिपाल भाग गए थे। पुलिस बरेली के एक अस्पताल में कल्लू यादव का इलाज करा रही थी। शनिवार रात कल्लू यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद उसका शव गांव ले जाया गया।
कल्लू यादव के परिवार में उसका बड़ा भाई शिशुपाल और मां नारायणी हैं। कल्लू यादव की शादी नहीं हुई थी। रविवार को कल्लू का शव पैरहा गांव पहुंचा। उसका भाई शिशुपाल यादव शव देखने तक नहीं आया। बाद में अंत्येष्टि स्थल पर कल्लू का शव मुखाग्नि को इंतजार करता रहा। जब कोई आगे नहीं आया तो उसकी मां नारायणी देवी ने मुखाग्नि देने की बात कही। गांव के लोगों ने इसका विरोध किया। तय हुआ कि पांच लोग मिलकर मुखाग्नि देंगे। बाद में कल्लू यादव के चचेरे भतीजे ने मुखाग्नि दी।
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दूध डेयरी से रखा था अपराध की दुनिया में कदम
दातागंज। कल्लू यादव के पिता मक्खन यादव इलाके के नामचीन पहलवान थे। मक्खन यादव की दो संतानों में शिशुपाल यादव की शादी हो चुकी है। मक्खन की मौत के बाद कल्लू का रुझान अपराध की ओर हो गया। दूध डेयरी के कारोबार से उसने अपराध की दुनिया में ऐसा कदम रखा जो उसकी मौत के साथ ही खत्म हुआ।
कल्लू यादव के पिता मक्खन पहलवान के पास 30 बीघा जमीन थी। उनकी मौत के बाद शिशुपाल, कल्लू यादव और कल्लू की मां नारायणी देवी के हिस्से में 10-10 बीघा जमीन आई। कल्लू यादव ने अपनी 10 बीघा जमीन बेचने के बाद बरेली के नकटिया में दूध डेयरी खोली। कारोबार फेल होने पर उसने डेयरी बेच दी इसके बाद दबाव बनाकर अपनी मां के हिस्से की 10 बीघा जमीन भी बेच डाली। बरेली के फरीदपुर में एक मकान खरीदा। फरीदपुर में ही कल्लू यादव की जान पहचान ऋषिपाल से हुई। इसके बाद कल्लू अपराध की दुनिया में कूद पड़ा।
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कटरी का कलुआ नहीं बन सका कल्लू यादव
दातागंज। पैरहा के कल्लू यादव ने सपना तो देखा था कटरी का कलुआ बनने का, लेकिन उसका यह ख्वाब पूरा नहीं हो सका। करीब 25 दिन पहले लूट के मामले में जमानत पर छूटने के बाद कल्लू ने इलाके में आतंक मचा दिया था। वह हर रोज लूट और राहजनी की वारदात को अंजाम देता था। दातागंज पुलिस इस पर गौर नहीं कर रही थी। 22 जून की रात भी कल्लू यादव अपने साथी नन्हे और ऋषिपाल के साथ लूट के इरादे से बरेली रोड पर था। यहां उसकी पुलिस ने मुठभेड़ हो गई। इसमें घायल कल्लू यादव ने पांच दिन इलाज के बाद दम तोड़ दिया।
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ऋषिपाल की गिरफ्तारी बनी पुलिस के लिए चुनौती
नन्हे के सरेंडर से हुई फजीहत से बचने को जुटी पुलिस
बदायूं। पुलिस मुठभेड़ और दरोगा हत्याकांड के आरोपी कल्लू यादव की मौत और नन्हे के कोर्ट में सरेंडर होने के बाद फजीहत से बचने के लिए पुलिस हाथ पांच मार रही है। पुलिस का पूरा फोकस ऋषिपाल यादव की गिरफ्तारी पर है। अब देखना यह है कि उसे पुलिस गिरफ्तार कर पाती है या नहीं।
घायल कल्लू यादव ने पुलिस को बयान दिया था कि मुठभेड़ वाले दिन उसके साथ नन्हे यादव और ऋषिपाल थे। दोनों की गिरफ्तारी को चार सीओ के नेतृत्व में 12 पुलिस टीमों को लगाया गया। पुलिस को चकमा देकर शनिवार को नन्हे ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इससे पुलिस की काफी फजीहत हुई। ऋषिपाल यादव अब भी फरार है। नन्हे के सरेंडर से हुई फजीहत से बचने के लिए पुलिस हर कीमत पर ऋषिपाल यादव को गिरफ्तार करना चाह रही है।
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पुलिस टीमें लगी हुई हैं। ऋषिपाल यादव को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए कल्लू का हर संभव इलाज कराया जा रहा था। इलाज के दौरान उसकी मौत हुई है।-अनिल कुमार यादव, एसएसपी