बदायूं। नौ साल पहले जमीन हड़पने के लालच में नाबालिग सौतेले साले की हत्या के मामले में नामजद आरोपी को एडीजे ईसी एक्ट अखिलेश कुमार ने दोषी ठहराया है। न्यायाधीश ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
थाना इस्लामनगर क्षेत्र के गांव लभारी की मढैया निवासी त्रिलोकी पुत्र कल्लू ने सात नवंबर 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक उसकी पत्नी शीला देवी के पहले पति किशनलाल की मृत्यु हो गई थी। उसकी शादी के समय उसकी पत्नी के पहले से तीन पुत्रियां थी। इसमें नन्हीं अपने मायके में अपने पति संतोष पुत्र विक्रमपाल खागी निवासी खेतापुर थाना बहजोई जनपद संभल के साथ रह रही थी। संतोष अपनी सास शीला देवी पर जमीन अपने नाम कराने के लिए दबाव डालता था, पर शीला देवी ने साफ मना कर दिया।
इसके बाद संतोष ने अपने नाबालिग साले नरेंद्र को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। सात नवंबर की शाम पांच बजे संतोष अपने साले नरेंद्र को शौच के बहाने ले गया और एक खेत में ले जाकर जान से मारने की नीयत से उसके सीने पर चाकू से प्रहार किए। शोर पर आसपास के लोग आ गए तभी मौके से संतोष भाग गया। इलाज को ले जाते समय नरेंद्र ने अपने पिता त्रिलोकी को बताया कि उस पर जानलेवा हमला संतोष ने किया है।
इतना बताने के बाद उसकी रास्ते मे मृत्यु हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की। एडीजे अखिलेश कुमार ने कोर्ट ने अभियोजन की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार गुप्ता और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस को सुना। कोर्ट ने हत्या में नामजद संतोष को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।