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Budaun News: पोस्टमार्टम हाउस के फ्रीजरों में वर्षों से जमी हैं खून की परतें, चूहे-नेवलों ने बनाया घर

Tue, 19 Dec 2023 03:58 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी वर्षों से बदहाल है। मोर्चरी में छह फ्रीजर हैं। इनमें चार खराब हैं। गर्मियां निकल गईं लेकिन मोर्चरी के खराब फ्रीजर ठीक नहीं कराए गए। 
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पोस्टमार्टम हाउस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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बदायूं में महिला के शव से आंखें गायब होने के बाद पोस्टमार्टम हाउस व जिला अस्पताल की मोर्चरी पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। दोनों जगह की मोर्चरी का बुरा हाल है। वर्षों से साफ-सफाई नहीं हुई है। फ्रीजरों में वर्षों से खून की परतें जमी हुईं हैं। तमाम कीड़े-मकोड़े, चूहा, नेवलों ने अपने घर बना लिए हैं। पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी वर्षों से बदहाल है। गर्मियां निकल गईं लेकिन मोर्चरी के खराब फ्रीजर ठीक नहीं कराए गए। 

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 मोर्चरी में छह फ्रीजर हैं। इनमें चार खराब हैं। लोगों को दिखाने के लिए खराब फ्रीजरों में ही शवों को रख दिया जाता है। एक दिन पहले मरने वालों के शव ज्यादा खराब नहीं होते लेकिन जो शव पहले से खराब होते हैं, उनकी दशा और ज्यादा खराब हो जाती है। फ्रीजरों में लगातार शव रखने से खून की परतें तक जम गईं हैं। पोस्टमार्टम हाउस में कीड़े-मकोड़ों, चूहों, नेवलों ने घर बना लिए हैं। 

प्रभारी सीएमओ ने किया निरीक्षण
सोमवार को प्रभारी सीएमओ डॉ. अब्दुल सलाम पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस और मोर्चरी का निरीक्षण किया। वह करीब एक घंटे तक पोस्टमार्टम हाउस पर रुके और जुटाई। इस दौरान फ्रीजरों की दशा भी देखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही पोस्टमार्टम हाउस की हालत में सुधार लाया जाएगा। 

 

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निलंबित सीएमओ की गिरफ्तारी की मांग
व्यवस्था सुधार मिशन के तत्वावधान में अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह राठौड़ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर निलंबित मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय की गिरफ्तारी की मांग की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि निलंबित सीएमओ ने सरकारी चिकित्सा तंत्र को दुर्बल बनाने तथा निजी चिकित्सा तंत्र को संरक्षण देने का काम किया, परिणाम स्वरूप जनपद में चिकित्सा माफिया ने जन्म लिया। 

अप्रिय घटना घटित होने पर पता चलता है कि अस्पताल मानक के विरुद्ध संचालित था। मृत महिला के शव से आंखें गायब होना जनपद के लिए शर्मनाक है, ऐसी घटनाओं के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी जिम्मेदार हैं। इस प्रकरण में पंजीकृत अभियोग में डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय को भी अभियुक्त बनाया जाए तथा शीघ्र गिरफ्तारी हो। इस मौके पर धनपाल सिंह, संरक्षक एमएल गुप्ता, रामगोपाल, राजेश गुप्ता, ज्योति शर्मा आदि मौजूद रहे। 
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