सरकार के गांव-गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के दावे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। बिसौली के आसफपुर ब्लाक के गांव लक्ष्मीपुर में बना उप स्वास्थ्य केंद्र बदहाली की हालत में है। इसका निर्माण 2013 में 10 लाख रुपये की लागत से हुआ था। अब तक यहां स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है। स्वास्थ्य केंद्र का भवन आपराधिक तत्वों का ठिकाना बना हुआ है।
प्रदेश सरकार ने एनआरएचएम के तहत 2013 में जिले में 12 हजार की आबादी वाले 10 गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कराया था। मंशा थी कि बड़े गांवों में लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों में आसानी से इलाज मिल सके। 2014 में सभी स्वास्थ्य केंद्र विभाग के हैंडओवर कर दिए गए। लक्ष्मीपुर का उप स्वास्थ्य केंद्र आसफपुर सीएचसी से संबद्ध किया गया था। इस स्वास्थ्य केंद्र का गांव के लोगों को अब तक कोई लाभ नहीं मिला है। स्टाफ के नाम पर एक एएनएम की तैनाती की गई है, लेकिन वह भी यहां कभी-कभार ही आती है।
गांव के लोग लगाते हैं आसफपुर की दौड़
दबतोरी। उप स्वास्थ्य केंद्र बनने के बाद लक्ष्मीपुर के लोगों को लगा था कि अब उनको छोटी-मोटी बीमारियों का गांव में ही इलाज हो जाएगा, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। छोटी-मोटी बीमारियों में भी गांव के लोगों को आसफपुर सीएचसी की दौड़ लगानी होती है। आसफपुर सीएचसी पर भी सिर्फ एक डॉक्टर की तैनाती है। ऐसे में यहां भी अव्यवस्थाएं हावी रहती हैं। लोगों को आसानी से इलाज नहीं मिल पाता है।
वर्जन-
स्टाफ की तैनाती के लिए अधिकारियों को कई बार लिखा जा चुका है। उप स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम की तैनाती है। अगर एएनएम केंद्र पर नहीं पहुंचती तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. पंकज शर्मा, एमओआईसी, आसफपुर