बदायूं/बिल्सी। बिल्सी के प्रिंस हत्याकांड में थाना पुलिस का ढीला रवैया देखने को मिला। पहले तो पुलिस लापता युवक को ही तलाश नहीं कर पाई और जब परिवार वालों ने आरोपियों के नाम पता उपलब्ध कराए तो उनसे पूरी जानकारी तक हासिल नहीं कर सकी। सोमवार को आधा अधूरा खुलासा करके इतिश्री कर ली गई।
कस्बे के खैरी बस स्टैंड निवासी प्रिंस कुमार की दो फरवरी की रात हत्या कर दी गई थी लेकिन इसके बारे में उसके पिता राजेश कुमार को जानकारी नहीं थी। वह प्रिंस को लापता मान रहे थे। उन्होंने बिल्सी पुलिस को सूचना दे दी थी। इसके बावजूद 18 फरवरी तक पुलिस ने प्रिंस को तलाश नहीं किया और न ही किसी से पूछताछ की।
18 फरवरी की सुबह राजेश ने ही पुलिस को बताया था कि उनके बेटे प्रिंस की हत्या उनके दूसरे बेटे हर्ष और उसके साथियों ने की है। तब पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा। फिर भी पुलिस पूरी सच्चाई उजागर नहीं कर पाई। इसमें भी पुलिस को तीन दिन लग गए। एक समय तो पुलिस आरोपियों की ही बातों में आ गई और युवक को तलाश करने कछला गंगा घाट पहुंच गई। अगर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया होता तो आरोपियों को पकड़ने में इतना समय नहीं लगता।
आखिर भाई ने भाई को क्यों मार दिया
- कहने को पुलिस के हाथ बहुत लंबे होते हैं लेकिन इस मामले में या पुलिस आरोपी सराफा व्यापारी को बचाने में जुटी रही या फिर इस हत्याकांड की ठोस वजह ही पता नहीं कर पाई। ऐसी क्या बात हुई, हर्ष ऐसे कौन से लालच में आ गया था, जिससे उसने अपने भाई प्रिंस की हत्या कर दी। इन सवालों के जवाब पुलिस के पास नहीं हैं। न ही पुलिस ने इनके जवाब जानने की कोशिश की।
दस लाख रुपये में सौदे का मिला ऑडियो, किसने किया पता नहीं
- इस मामले में पुलिस को एक ऑडियो मिलने की जानकारी सामने आई है। इस ऑडियो में प्रिंस की हत्या करने का 10 लाख रुपये में सौदे का जिक्र है। यह ऑडियो आरोपी दिवांश के मोबाइल से बरामद हुआ है। वह किससे बात कर रहा है, पुलिस इसके बारे में कुछ नहीं जानती। उदय का इसमें क्या भूमिका रही। पुलिस ने यह भी खुलासा नहीं किया है। पुलिस हर सवाल का जवाब देने से बच रही है। इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह भी एक ऑडियो की बात कह रहे हैं, लेकिन उसके बारे में पूछने पर भी उनका गोलमोल जवाब है। इधर, सीओ सुनील कुमार को शाम को कई बार फोन किए जाने पर भी उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।