बदायूं। जिला महिला अस्पताल के एमएनसीयू में इन्फेक्शन से बचाव के साधन, सामान और दवाएं खत्म हो गई हैं। वहां भर्ती होने वाले नवजात का कुछ दवाओं के जरिए इलाज किया जा रहा है। इससे बच्चों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ गया है। यही नहीं एमएनसीयू में दौरे की दवा और एक एमएल वाली सिरिंज तो बिल्कुल बिल्कुल नहीं है। इससे कर्मचारी परेशान हैं।
अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में जब एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनटि) था, तब वहां कुल 12 बेड पर नवजात भर्ती किए जाते थे। तब एसएनसीयू 10 बेड के लिए रजिस्टर्ड था और उसी के अनुसार सुविधाएं मिलती थीं। मगर करीब आठ माह पहले बिल्डिंग बदलने के साथ एसएनसीयू का नाम बदलकर एमएनसीयू (मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट) कर दिया गया। इसमें बेड बढ़ाकर 20 कर दिए गए।
एमएनसीयू में बेड बढ़ने के बावजूद सुविधाएं नहीं बढ़ीं। सुविधाएं न होने से वहां भर्ती होने वाले बच्चे इलाज से स्वस्थ्य होने के बजाय इंफेक्शन का शिकार हो सकते हैं। बताते हैं कि एमएनसीयू में इस समय हैंडवॉश, स्प्रिट, शू कवर, टेप, कुछ दवाइयां, इंजेक्शन, दौरे की दवाईयां, एक एमएल की सिरिंज खत्म हो चुकी हैं। जबकि हैंडवॉश, स्प्रिट तो स्टाफ और चिकित्सक को हमेशा प्रयोग करना पड़ता है। एक बच्चे को देखने के बाद उन्हें तुरंत हाथ धोने पड़ते हैं। बगैर शू कवर के एमएनसीयू में घूमना किसी खतरे से कम नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पिछले साल फैला था इंफेक्शन, तीन माह में मरे थे 37 नवजात
एक साल पहले जब एसएनसीयू पुरानी बिल्डिंग में चल रहा था, तब बच्चों इंफेक्शन फैला था। इससे तीन माह में 37 बच्चों की मौत हो गई थी, जिससे लखनऊ तक खलबली मची थी। इसकी सूचना पर डीजी हेल्थ तक को अस्पताल आना पड़ा था। उसके बाद कुछ सुविधाओं में बढ़ोतरी की गई। तब कहीं बच्चों की मौत का सिलसिला बंद हुआ।
एमएनसीयू में कुछ सामान खत्म हो गया है। हमने इसका इंडेंट बनाकर भेजा है। अभी सामान नहीं मिल सका है। एमएनसीयू में बच्चों का इलाज जिम्मेदारी से चल रहा है। दौरे की दवा बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
- डॉ. संदीप वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ एमएनसीयू