श्रमिकों को पंजीकरण के बाद विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। पहले पंजीकरण की अनिवार्यता नहीं थी। अब श्रमिकों का पंजीकरण जरूरी है। इसके लिए वर्ष 2014 के अंत में ब्लाक स्तर तक बड़ा अभियान चला और पंजीयन हो गए। पंजीयन के बाद ब्लाकों के रिकार्ड भी जिला मुख्यालय श्रम प्रवर्तन कार्यालय आ गया। यह रिकार्ड ऐसे ही ढेर के रूप में पड़ा हुआ है। कोई योजना बिना ऑनलाइन प्रदान नहीं की जा रही है, सो यहां भी योजनाएं ठप पड़ी हैं। व्यवस्था है कि श्रमिकों के लिए साइकिल को 3000 रुपये, सोलर लाइट और मातृत्व
लाभ और शिशु हित लाभ मिलेगा। लेकिन श्रम प्रवर्तन विभाग को ऑनलाइन रिकार्ड बनाने के लिए अभी कोई सुविधा नहीं मिली है। पंजीयन के रिकार्ड बंधे पड़े हैं। पंजीयन ऑनलाइन हो तो उससे सरकार श्रमिकों को लाभ देना शुरू करे।
वर्ष 2014 की साइकिलें दी जा रहीं अब तक
नवंबर-14 की लाभार्थी सूची में शामिल श्रमिकों को साइकिलों को लाभ दिया जा रहा है। 1142 मजदूर लाभार्थियों की सूची में शामिल किए गए। उस समय से अब तक सभी श्रमिकों को लाभ नहीं मिल सका है। अभी तक इस सूची के श्रमिक लाभांन्वित हो रहे हैं।
श्रमिकों के पंजीयन ऑनलाइन होने पर ही उनको लाभ मिल सकता है, लेकिन उनके यहां अभी श्रमिकों का पंजीयन होने के बाद भी ऑनलाइन नहीं हुआ है। पांच कंप्यूटर तो मिल गए हैं, लेकिन ऑपरेटर केवल एक ही है। लगभग 33 हजार श्रमिकों का पंजीयन ऑनलाइन होना है। जिसके लिए वह उच्च अधिकारियों से ऑपरेटर की मांग कर रहे हैं जो अभी पूरी नहीं हुई है।
- आरपी यादव, श्रम प्रवर्तन अधिकारी