तहसील सदर के गांव मूसाझाग में शीतलहर की चपेट में आने से मजदूर की मौत हो गई। ग्रामीणों ने इसकी सूचना फोन पर तहसील प्रशासन को दी लेकिन किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर जानकारी जुटाना जायज नहीं समझा। बाद में परिवार वालों ने बिना पोस्टमार्टम के ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। शीतलहर से जिले में यह पहली मौत है।
मूसाझाग थाने के गांव मचलई निवासी ध्यानपाल (40) पुत्र राजाराम मजदूरी करके अपने परिवार को पालते थे। इनका परिवार गरीब और भूमिहीन है। ध्यानपाल का पूरा मकान कच्चा है। गरीबी की वजह से सर्दी से बचने के लिए पर्याप्त गरम कपड़े भी नहीं थे। गुरुवार रात यह घर के बरामदे में सोए थे। सुबह करीब साढ़े छह बजे ध्यानपाल की हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। उनका पूरा शरीर अकड़ा हुआ था। ध्यानपाल के चार बच्चे विनीता (17), अवधेश (15), गोविंद (13) और भैयालाल (11) हैं। गांव वालों का कहना है कि ध्यानपाल की शीतलहर से मौत की सूचना तहसील प्रशासन के अधिकारियों को दी गई, लेकिन राजस्व विभाग के किसी भी अधिकारी या लेखपाल ने मौके पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा। ध्यानपाल की मौत के बाद इनकी पत्नी छाया और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
चंदे के रुपयों से हुई अंत्येष्टि
मूसाझाग। परिवार का यह हाल है कि वह गरीबी के चलते ध्यानपाल की अंतेष्टि के लिए पैसा भी नहीं जुटा पाए। गांव वालों ने आपस में चंदा करके रुपये जुटाए। चंदे के रुपयों से गांव में ही ध्यानपाल की अंत्येष्टि की गई।
तहसीलदार सदर राजमणि मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। संबंधित लेखपाल को मौके पर भेजा गया है। लेखपाल की रिपोर्ट आने के बाद मामले में जो भी जरूरी होगा कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।