60 प्रत्याशी मैदान में, बदायूं-सहसवान से दो-दो, अन्य से एक-एक नामांकन पत्र वापस
विधानसभा चुनाव के लिए सहसवान से डीपी यादव के बेट कुणाल सिंह और बिसौली से प्रीति सागर समेत आठ प्रत्याशियों ने बुधवार को अपना नाम वापस ले लिया।
बदायूं सदर सीट से खालिद परवेज ने दो में से एक पर्चा वापस ले लिया। उन्होंने एक पर्चा एमआईएम प्रत्याशी के रूप में और दूसरा निर्दलीय भरा था। निर्दलीय वाला पर्चा उन्होंने वापस ले लिया। इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विमलेश कुमारी ने भी पर्चा वापस कर लिया। सहसवान सीट से कुणाल के अलावा निर्दलीय साजिदा खान और बिल्सी से महान दल के सुरजीत कुमार तोमर, शेखूपुर से जन अधिकार मंच के तरुण प्रताप सिंह तथा दातागंज विधानसभा सीट से निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप ने अपना नामांकन पत्र वापस लिया है। नाम वापसी के लिए बुधवार को सुबह से काफी सुगबुगाहट रही। कलेक्ट्रेट में पहुंचे आठ प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र वापस लिए। इसके बाद चुनाव चिन्ह आवंटन की प्रक्रिया कराई गई। आठ पर्चे वापस होने के बाद सभी छह सीटों पर चुनाव मैदान अब 60 प्रत्याशी रह गए हैं।
रोजगार सेवक धर्मेद्र भी हटे
बदायूं। दातागंज सीट से निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल निषाद पार्टी से पर्चा वापस लेने वाले धर्मेंद्र कश्यप के मामले में सामने आया है कि वह रोजगार सेवक हैं। चूंकि रोजगार सेवक का पद संविदा वाला है, जिसकी जिम्मेदारी गांवों में मनरेगा कार्यों के लिए मानदेय पर है इसलिए सोमवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्दलीय लड़ रहे राजेंद्र शाक्य ने आपत्ति दर्ज कराकर पर्चा निरस्त करने की मांग की। इसके बावजूद रोजगार सेवक धर्मेंद्र का पर्चा वैध मान लिए जाने पर सवाल उठते हैं लेकिन आरओ का कहना है कि ऐसी कोई लिखित आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। धर्मेंद्र ने कहा कि अगर उनका पर्चा गलत था तो खारिज होने पर उनको कोई आपत्ति नहीं होती। वहीं, पर्चा वापस के बाद धर्मेंद्र ने कहा कि उनकी निषाद पार्टी का पीस पार्टी से समझौता हुआ था इसमें दातागंज सीट उनको लड़ने को दी गई थी। इसके बावजूद पीस पार्टी ने प्रत्याशी उतार दिया। इसके विरोध में उन्होंने पर्चा वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि वह निषाद पार्टी के मंडल अध्यक्ष और प्रदेश महासचिव पद से भी इस्तीफा दे देंगे।
पति के लिए विमलेश और साजिदा ने भी नामांकन वापस लिया
जिले में कई प्रत्याशियों ने अपनों के लिए चुनावी मैदान से चुपचाप कदम पीछे खींच लिए। बुधवार को जिन आठ प्रत्याशियों ने अपने पर्चे वापस लिए उनमें से कई अब चुनाव मैदान में उतरे अपने परिजन के लिए लड़ाने को जी-जान से जुटेंगे। सच तो यह है कि इन्होंने इसलिए अपना नामांकन कराया था ताकि उनके परिवार के दूसरे सदस्य का पर्चा जांच में खारिज होने की स्थिति में वह चुनाव मैदान में उतर सकें।
बुधवार को सहसवान विधानसभा सीट से डीपी यादव के बेटे कुणाल सिंह ने अपना पर्चा वापस ले लिया क्योंकि उनकी मां उमलेश यादव इसी सीट से रापद की प्रत्याशी हैं। कुणाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कराया था। इसी तरह बिसौली सुरक्षित सीट निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति सागर उर्फ पुष्पारानी ने अपने भाजपा प्रत्याशी बेटे कुशाग्र सागर के लिए नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने भी किसी कारणवश बेटे का नामांकन पत्र खारिज होने की स्थिति में खुद चुनाव लड़ने के इरादे से नामांकन कराया था। इनमें बदायूं सदर विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी महेश चंद्र गुप्ता की पत्नी विमलेश कुमारी भी शामिल हैं। उन्होंने भी निर्दलीय नामांकन कराया था, जिसे बुधवार को वापस ले लिया है। सहसवान सीट से नामांकन वापस करने वाली निर्दलीय साजिदा खान के पति अरशद अली बसपा के प्रत्याशी हैं।