पत्रकार वार्ता को संबोधित करते सपा नेता आबिद रजा। स्रोत-स्वयं
बदायूं। पूर्व मंत्री आबिद रज़ा ने रविवार को पत्रकार वार्ता कर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मौत की भी एक काट है, लोगों के ज़हन में ज़िंदा रहना सीख लो। उन्होंने दावा किया कि खामेनेई ने किसी भी दबाव के आगे समझौता नहीं किया। वे आखिरी दम तक अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। उनकी शहादत को दुनिया कयामत तक याद रखेगी।
आबिद रज़ा ने कहा कि आज की तारीख इतिहास में दर्ज रहेगी और यह दिन मरहूम खामेनेई की शहादत से जाना जाएगा। उन्होंने उन्हें “रहबर-ए-इंकलाब” बताते हुए कहा कि जो लोग जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं, वे कभी मरते नहीं, बल्कि शहीद होकर लोगों के दिलों और दिमाग में ज़िंदा रहते हैं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि बहादुरी के लिए उम्र या जिस्मानी ताकत मायने नहीं रखती, बल्कि इंसान की रूह और ईमान उसे मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि खामेनेई 86 वर्ष के थे, लेकिन उनकी आत्मिक शक्ति और साहस ने उन्हें विश्व स्तर पर अलग पहचान दी। कहा कि जो व्यक्ति अल्लाह के आगे सिर झुकाता है, उसका सिर दुनिया में किसी ताकत के सामने नहीं झुकता।