करीब तीन घंटे बिलंव से शुरू हुए गंगा-जमुनी तहजीब के इस संगम में मंच की कमान इलाहाबाद की सरजमी से आए शायर इमरान प्रतापगढ़ी को सौंपी गई थी। उन्होंने कवि कुमार विश्वास के अंदाज में बखूबी संचालन करने की जिम्मेदारी निभाई। मंचासीन कवि शायरों में चार-पांच बड़े हस्ताक्षर थे, जिन्हें श्रोता सुनने आए थे, लेकिन सम्मान की लंबी फेहरिस्त और स्थानीय कवियों की ‘घुसपैठ’ ने काव्य निशा को बोझिल और थकाऊ सा बना दिया। हालांकि इमरान ने श्रोताओं को अंत तक जोड़े रखने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन श्रोताओं का मूड भांपकर रचनाएं परोसने का काम कुछ ने ही किया।
मसलन, पद्मश्री से नवाजे जा चुके डॉ. सुनील जोगी ने सपा के सांसद को सामने बैठे देख ताड़ लिया कि उन्हें यहां क्या सुनाना है, सो उन्होंने महंगाई को बयां करते हुए अपनी बात शुरू की- जब मेरी पत्नी ने महंगाई का रोना रोते हुए कम रेट पर दीपावली पर पटाखे और मिठाई लाने को कहा, तो मैंने सुझाव दिया कि भाजपा के कार्यालय से ले आओ, आधे रेट पर मिलेंगे। ‘यही नहीं उन्होंने तालियों के स्वर को असली समाजवाद बताते हुए तालियां भी बजबाईं। थोड़े दिन पहले तक ‘कांग्रेस का हो गया बंटाधार रसिया...मोदी ने बना ली सरकार रसिया’ जैसी रचना प्रस्तुत कर कमल दल में खूब तालियां बटोरने वाले जोगी इस बार समाजवादी रंग में पगे नजर आए।
इमरान प्रतापगढ़ी ने भी सांसद से अपनी नजदीकियों का जिक्र का लोभ नहीं त्यागा। बताया कि इलाहाबाद में पढ़ाई के दौरान धर्मेंद्र उनके सीनियर थे। उन्होंने मुसलमानों के दर्द को अपनी कविता का विषय बनाया। दादरी कांड को उठाकर मादरे वतन के सामने कुछ सवाल भी छोड़े। उन्होंने ये शेर सुनाकर समाजवादवयिों की वाहवाही भी लूटी-
जंग की बातें करने वाले, बड़े प्यार से हार गए
विश्व विजय पर निकले थे, लेकिन बिहार से हार गए,
कल जो सपना देख रहे थे, नेताजी को हराने का
नेताजी को छोड़ो उनके, रिश्तेदार से हार गए।
कवि मनवीर मधुर भी सियासी मोह से खुद को विरक्त नहीं रख पाए। बोले, साहित्य और समाज की जितनी समझ सैफई के इस समाजवादी परिवार में है, उतनी किसी में नहीं। शायर कुंवर जावेद भी इससे अछूते नहीं रहे। उन्होंने नेताजी मुलायम सिंह यादव को समर्पित गीत पढ़ा। बलवीर सिंह खिचड़ी को छोड़ प्रीति विश्वास, नगमा बरेलवी, उमर काविश, कृष्ण कुमार नाज अपनी छाप नहीं छोड़ पाए। बिजी शेड्यूल के बावजूद सांसद धर्मेंद्र यादव ने अलसुबह तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जोगी और सांसद के रहने तक श्रोता भी जमे रहे। बाद में भीड़ छटती चली गई। मुशायरे के सदर कुंवर बेचैन के पढने तक गिने-चुने श्रोता ही पंडाल में बचे।
बचैन, जावेद, मनवीर और दीन का सम्मानित
बदायूं। यूनियन क्लब परिसर में हुए कवि सम्मेलन के बीच में मुख्य अतिथि सांसद धर्मेंद्र यादव ने डॉ. कुंवर बेचैन को डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी, दीन मोहम्मद दीन को फानी बदायूंनी, कुंवर जावेद को शकील बदायूंनी और मनवीर मधुर को डॉ. उर्मिलेश स्मृति वंदन सम्मान से नवाजा गया। स्थानीय स्तर पर वरिष्ठ साहित्यसेवी सम्मान दातागंज के उमेश अकेला, बिसौली के बाबर आसी खां, घटपुरी के केदारनाथ घट, शहर के चंद्रपाल सिंह सरल को दिया गया। श्रेष्ठ युवा कवि का पुरस्कार कुमार आशीष को प्रदान किया गया। सभी को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। स्मृति वंदन स्मारिका का विमोचन किया गया।
ये रहे मौजूद
सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव, पूर्व राज्यमंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल, डॉ. वीपी सिंह सोलंकी, प्रदीप यादव, डॉ. निशि अवस्थी, पूनम अग्रवाल, रविंद्र कुमार सिंह दद्दू, हाजी नूरुद्दीन, अनुपम गुप्ता, दलवीर सिंह यादव, डॉ. सचिन गुप्ता, राजन मेहंदीरत्ता, बलवीर यादव, भानु प्रकाश भानु, मनोज कुमार सिंह, डॉ. अरविंद धवल, सीमा यादव, स्वाले चौधरी, अवधेश लड्डा, स्वतंत्र प्रकाश, राकेश गुप्ता, डॉ.मनीराम, विवेक यादव, अब्दुल बहाव, विनोद सक्सेना आदि मौजूद रहे।
...वतन पर मरने वाले की वर्दी खरीदो तुम
बदायूं। कवि सम्मेलन मुशायरे का आगाज मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कवयित्री प्रीति विश्वास ने सरस्वती वंदना, तो उर कविश ने नात-ए-पाक पढ़ी।
व्यग्यंकार पदमश्री सुनील जोगी ने पढ़ा-
क्यों अपने कैमरे से जिंदगी के सीन लेता है,
वो अपने चाहने वालों के दुखड़े बीन लेता है।
कभी भूले से तू बेटी गर्भ में मार मत देना,
वो बेटी मारने वालों से बेटा छीन लेता है।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि डा. कुंवर बेचैन ने सुनाया
सारी धरा साथ दे तो और बात है,
पर तू जरा भी साथ दे तो और बात है।
चलने को तो एक पांव पर भी चल रहे हैं लोग,
पर दूसरा भी साथ दे तो और बात है।
शायर कुंवर जावेद ने फरमाया-
दिया बनूं तो पतंगा नसीब हो मुझको,
नहाना चाहूं तो गंगा नसीब हो मुझको।
मेरी ख्वाहिश अगर है तो बस ये है,
मैं यूं मरूं की तिरंगा नसीब हो मुझको।
इमरान प्रतापगढ़ी ने मोदी के सूट की नीलामी पर कटाक्ष करते हुए सुनाया-
बुढ़ापा क्या खरीदा है जवां मर्दी खरीदो तुम,
वतन के चाहने वालों की हमदर्दी खरीदो तुम।
सियासी शख्स की उतरन लेने से तो बेहतर है,
वतन पर मरने वाले शख्स की वर्दी खरीदो तुम।
अपर जिला जज ने लूटी वाहवाही
बदायूं। जिले के अपर जिला जज नलिन श्रीवास्तव ने मंच से काव्य पाठ कर श्रोताओं की भरपूर वाहवाही पाई। उन्होंने युवावस्था की अनुभूतियों को संजोते हुए अपने प्रोफेशन से इतर जो अपने अंदर के कलाकार का परिचय कराया, वो कुछ हंसोड़ कवियों को रास नहीं आया, उन्होंने उस पर तंज भी कसे।