बदायूं। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नगर पालिका परिसर में आयोजित कवि सम्मेलन में एक व्यक्ति ने कवि के ऊपर जूता फेंक दिया, जिससे कार्यक्रम में अफरातफरी मच गई। इसके बाद यहां जमकर हंगामा हुआ। बताते हैं कि इसके बाद कुर्सियां भी फेंकी गई और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी लगाए गए। कुछ देर बाद कार्यक्रम समाप्त कर दिया गया।
नगर पालिका परिसर में गत वर्ष की तरह इस बार भी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार रात कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन हुआ था। शहर के कई कवि मंच पर बैठे थे, जबकि संचालन कामेश पाठक कर रहे थे। उन्होंने कवि कुलदीप अंगार को काव्य पाठ करने के आमंत्रित किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुलदीप अंगार ने वाल्मीकि से लेकर आज तक कविता की यात्रा पर कविता पेश की। उनकी कविता का पहला छंद था कि ‘शब्द शब्द में कमाल काव्य, अर्थ में यह उछाल पैदा हो गए, कविता के नये रंग भूषण बिहारी, रंग कविरा के वंश में कमाल पैदा हो गए, कविता लगा कर कालचक्रों का यह जाल, आज काव्य गोष्ठी के दलाल पैदा हो गए।’ इतने पर श्रोताओं के बीच बैठे एक व्यक्ति ने उनके ऊपर जूता उछाल दिया। इससे कार्यक्रम में अफरातफरी मच गई। मंच पर बैठे कवि और संयोजक अशोक खुराना नीचे उतरकर आ गए। आरोप है कि इसी दौरान संयोजक ने यह कहना शुरू कर दिया कि कवि कुलदीप अंगार ने उनको दलाल कहा था, जिससे श्रोताओं में आक्रोश फैल गया। इधर कुछ लोगों ने कवि कुलदीप अंगार के साथ गाली गलौज कर दी। उन्होंने कुर्सियां फेंकनी शुुरू कर दीं, जिससे कार्यक्रम में अफरातफरी मच गई। बाद में लोगों ने जैसे-तैसे माहौल शांत किया। कवि कुलदीप अंगार ने संयोजक अशोक खुराना के बेटे विवेक खुराना पर जूता फेंकने का आरोप लगाते हुए जूता फेंकने और गाली गलौज करने की घटना को सुनियोजित बताया है। फिलहाल इस संबंध में कोई तहरीर आदि नहीं दी गई है लेकिन जूता फेंकने से लेकर गाली गलौज करने के वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं।
कवि कुलदीप अंगार को विधिवत रूप से कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था, लेकिन फिर भी उन्होंने विषय संदर्भित पक्तियों से हटकर काव्यपाठ करना शुरू कर दिया। उन्होंने काव्य के माध्यम से यहां तक कह दिया कि मंच पर सभी दलाल बैठे हैं। इससे श्रोताओं में आक्रोश पनप गया और किसी ने उनके ऊपर अपना जूता फेंक दिया।
अशोक खुराना, कार्यक्रम संयोजक
टेंट व्यवसायी अशोक खुराना के बेटे ने मुझ पर जूता उतारकर फेंका था जो डायस से टकराकर दूसरी ओर चला गया। इसके बाद उसने दूसरा जूता फेंका। जब मैंने उसका विरोध किया तो उसके पिता ने भी मुझसे अभद्रता की। यह बात भी गलत है कि मुझे आमंत्रित नहीं किया गया था। मुझे बाकायदा कार्यक्रम का आमंत्रण मिला था।
कुलदीप अंगार, कवि
- नगर पालिका में कार्यक्रम आयोजित करने की व्यवस्था हमने कराई थी लेकिन जो विवाद हुआ है, वह कवियों के आपस का मामला है। उन्हें एक-दूसरे की कविता पर एतराज था। हमारी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
संजय तिवारी, ईओ नगर पालिका