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कटरासआदतगंज कांड में पोस्टमार्टम पर बहस

Sat, 23 May 2015 11:41 PM IST
badaun
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चर्चित कटरा सआदतगंज कांड में सुनवाई कर रहे स्पेशल जज पाक्सो एक्ट/प्रथम एडीजे प्रमोद कुमार की कोर्ट में सीबीआई और वादी पक्ष के वकील के बीच क्लोजर रिपोर्ट और प्रोटेस्ट पर शनिवार को बहस हुई। वादी पक्ष के वकील ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर सवाल उठाए तो सीबीआई के वकील ने क्लोजर रिपोर्ट के पक्ष में दलीलें दीं। बहस पूरी न हो पाने पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए चार जून तय की है।
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कटरा सआदतगंज में 27/28 मई 2014 को चचेरी बहनों के शव पेड़ पर लटके मिले थे। परिवार वालों ने दो सिपाहियों और तीन सगे भाइयों पर गैंग रेप के बाद हत्या का आरोप लगाया था। मामले में जांच सीबीआई कर रही थी। जांच एजेंसी ने 11 दिसंबर 2014 को कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दावा किया था कि लड़कियों ने खुदकुशी की है। उनके साथ रेप नहीं हुआ। वादी पक्ष ने क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ 19 फरवरी को प्रोटेस्ट दाखिल किया था। वादी पक्ष के वकील ने सीबीआई जांच पर सवाल उठाए थे। वादी पक्ष की मांग पर कोर्ट ने सीबीआई को सभी साक्ष्य दाखिल करने का आदेश दिया था। छह जून को वादी पक्ष के वकील ने साक्ष्यों के अवलोकन के लिए कोर्ट से समय मांगा था। कोर्ट ने 23 मई बहस के लिय तय की थी।
शनिवार को दोनों सीबीआई के वकील कुमार रजत और वादी पक्ष के वकील एचएस नकवी के बीच कोर्ट में बहस हुई। नकवी ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और जांच पर सवाल उठाए। सीबीआई के वकील कुमार रजत ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक एक्सपर्ट की जांच में लड़कियों की मौत की वजह दम घुटने से बताई गई है। उनके साथ रेप की बात नहीं कही गई है। कोर्ट में करीब दो घंटे बहस चली। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए चार जून निर्धारित की है।
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यह बोले सीबीआई के वकील
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं उनके हिसाब से लड़कियों के साथ रेप नहीं हुआ। उनकी हत्या भी नहीं की गई। लड़कियों के पिता और मुख्य गवाहों के बयानों में भिन्नता है। पुलिस को दिए गए बयान और सीबीआई को दिए गए बयान अलग हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी स्पष्ट हो गया है कि रेप और हत्या की बात गलत है। -कुमार रजत, सीबीआई अधिवक्ता

यह बोले वादी पक्ष के वकील
सीबीआई की जांच में झोल है। जांच एजेंसी लगातार बहस से बचने की कोशिश कर रही है। लड़कियों का दोबारा से पोस्टमार्टम नहीं हुआ। बिना पोस्टमार्टम के सीबीआई कैसे तय कर सकती है कि  लड़कियों के साथ रेप नहीं हुआ। उनकी हत्या नहीं की गई। -एसएस नकवी, वादी पक्ष के अधिवक्ता
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