ब्रह्म मुहूर्त से ही ककोड़ा घाट पर स्नान शुरू हो गया। मेला में धार्मिक आयोजनों की धूम रही। मुंडन संस्कार और गंगा मैया को धोती पहनावा के अलावा जोत बजाने जैसे धर्म से जुड़े कार्यक्रम हुए। मेला में जमकर खरीदारी हुई तो खेल-तमाशे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोगों की भीड़ जुटी। सहभोज और भंडारे हुए। गंगा स्नान कर और सूर्य को अर्ध्य देकर धार्मिक पंडालों में पहुंचे लोगों ने यज्ञ किया और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। कल्पवासी तो वहां रुके ही हैं। इनके अलावा अधिकतर लोग स्नान कर वहीं रुक गए, जो प्रतिपदा को नहीं लौटेंगे। द्वितीया से मेला की वापसी शुरू हो जाएगी।
हालांकि इस वर्ष रुहेलखंड के मिनी कुंभ के मुख्य स्नान पर्व पर अपेक्षाकृत कम भीड़ जुटी। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार इस बार मात्र डेढ़ लाख लोग जुटे, जबकि पिछले सालों में ये संख्या चार से पांच लाख के बीच होती थी। मेला में स्नान करते समय तीन किशोरियां डूबने लगी, जिन्हें गोताखोरों ने बचा लिया। रोडवेज सेवाओं के संतोषजनक न होने से भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। मेला कोतवाली में छिटपुट घटनाओं की शिकायतें आईं, जिनका निस्तारण और समझौता करा दिया गया।
प्रधानी चुनाव से लगा है मेला को झटका
प्रशासन हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर मेले में जुटे श्रद्घालुओं की भीड़ का आंकलन शासन को भेजता है। इस बार की रिपोर्ट के अनुसार गत वर्ष की अपेक्षा भीड़ कम जुटी। इस साल 1.60 लाख लोग जुटे, जबकि पिछले वर्ष ये आंकड़ा 4.50 लाख था। वहीं कछला घाट पर इस बार जुटी भीड़ 40 हजार रही, जबकि पिछले साल ये संख्या 1.50 लाख थी।