गंगा के जलस्तर में भी कोई कमी नहीं आई है। जिला पंचायत प्रबंधन को
यहां इसी जलस्तर के हिसाब से स्नान घाट बनाने होंगे। सिरकी-पाल की व्यवस्था
पहले होती है। प्लाट कटते जाएंगे और सिरकी पाल से उनकी बाउंड्री होती
जाएगी। जिम्मेदार ठेकेदारों को वहां रहकर काम कराना होगा।
सूत्रों की
मानें तो इस बार मेला में ठेकेदार काम करने को ही तैयार नहीं हो रहे थे।
बजट में कमी भी इसका एक कारण माना जाता है। भुगतान में भी समस्या को लेकर
ठेकेदार आशंकित रहते हैं।
तैयारियों में लापरवाही के सवाल पर एएमए
हरिपाल सिंह अलग राय रखते हैं। इनके अनुसार, पहली बार मेला की व्यवस्थाएं
जल्दी शुरू कर दी गई हैं। सभी काम समय पर पूरे करा लिए जाएंगे।