कादरचौक। रुहेलखंड का मिनी कुंभ कहने जाने वाले प्रसिद्ध ककोड़ा मेला की तैयारियों के बीच मुख्य मार्ग को फोरलेन बनाने और वीआईपी मार्ग पर काम शुरू हो गया है। बरेली मार्ग, बाइपास, खैरती चौक मार्ग, कुर्मियान रोड, स्टेडियम रोड और कादरबाड़ी रोड का निर्माण होना अभी बाकी है। सड़कों का निर्माण समय से पूरा करना जिला पंचायत और प्रशासन के सामने चुनौती बन गया है। वहीं, गंगा का जलस्तर गिरने से साफ पानी का संकट गहराता नजर आ रहा है।
मेला ककोड़ा की परंपरा के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी को ककोड़ा देवी मंदिर से देवी की धर्म ध्वजा लाकर मेला स्थल पर स्थापित की जाएगी। झंडी पूजन के साथ मेले का विधिवत शुभारंभ होगा। इसके बाद मेला स्थल पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। मेले में करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। ऐसे में झंडी पूजन से पहले आवागमन के रास्तों और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करना जरूरी है। मेले का आयोजन जिला पंचायत प्रशासक वर्षा यादव की देखरेख में होगा। मेला अधिकारी उपजिलाधिकारी सदर हैं। सड़कों के निर्माण के साथ प्रकाश, पेयजल, सफाई, शौचालय, सुरक्षा और स्नान घाटों की व्यवस्था समय से पूरी करनी होगी।
उधर, जिला पंचायत के इंजीनियर पवन कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को मेला स्थल पर मुख्य मार्ग को फोरलेन बनाने का काम किया जा रहा है। वीआईपी मार्ग पर भी निर्माण शुरू हो गया है। जल्द अन्य सड़कों का निर्माण भी शुरू कराया जाएगा।
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तीन साल से गंगा की मुख्य धारा से दूर लगता आ रहा है मेला
पिछले तीन साल से मेला स्थल गंगा की मुख्यधारा से दूर लगता आ रहा है। इस बार जलस्तर घटने से स्नान के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की समस्या बन सकती है। पिछले वर्ष चार नवंबर को मुख्य स्नान हुआ था, जबकि इस बार 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान होगा। जलप्रवाह कम रहने पर स्नान घाटों पर पानी की गहराई कम हो सकती है। कीचड़ की समस्या भी पैदा हो सकती है। जिला पंचायत जलस्तर बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है।
मुख्यधारा के हिसाब से तय हो मेला स्थल
गंगा की धारा में बदलाव के कारण पहले ही मेला स्थल को पांच से दस किलोमीटर तक स्थानांतरित किया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि मेला स्थल का निर्धारण गंगा की वर्तमान मुख्यधारा, जलस्तर और स्नान की सुविधा को ध्यान में रखकर क्यों नहीं किया जाता। श्रद्धालुओं की प्रमुख आस्था गंगा स्नान से जुड़ी है, इसलिए मुख्य स्नान से पहले पर्याप्त पानी की व्यवस्था जरूरी है।