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परिस्थितियों से नहीं मानी वरुण ने हार, अब कबड्डी खिलाड़ियों के लिए बन रहे खेवनहार

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बदायूं। प्रदेश के पिछड़े जिलों में शुमार बदायूं अभी भी इस लिस्ट से बाहर नहीं निकल पाया है। यही वजह है कि जिले में अधिकांश प्रतिभाओं को मंच नहीं मिल पाने की वजह से उनका कॅरियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। इसके बावजूद भी कुछ प्रतिभाएं ऐसी है, जिन्हें भले ही परिस्थितियों ने आगे बढ़ने से रोक दिया हो, लेकिन वह दूसरों की प्रेरणा बनकर मार्गदर्शन कर रही हैं। ऐसे ही हैं वरुण सिंह, जो एक बेहतरीन कबड्डी खिलाड़ी होने के बावजूद खुद तो नहीं खेल पाए लेकिन अब कोच के रूप में लगातार खेल प्रतिभाओं को निखारने में जुटे हैं। वर्तमान में वरुण विभिन्न एसोसिएशन और शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित कबड्डी प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को खेल के गुर सिखा रहे हैं।
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बिल्सी के गांव सिरासौल निवासी ओमकार सिंह पेशे से किसान हैं। उनके पुत्र वरुण सिंह एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो गांव की पृष्ठभूमि होने के कारण शुरू से ही कबड्डी के बेहतरीन खिलाड़ी बनकर उभरे। गांव में रहने के कारण उनकी प्रतिभा में दिनोंदिन निखार आता गया लेकिन परिस्थितियों के कारण वह खुद को एक खिलाड़ी के रूप में स्थापित नहीं कर सके। गांव में रहने और आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी न होने के कारण उनकी प्रतिभा दबकर रह गई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे ही अपनी ताकत बना लिया और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया।
वरुण फिलहाल मुरादाबाद की तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी से एमपीएड कर रहे हैं। उन्होंने 2018 में हुई कबड्डी की इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। यहां पर उनकी टीम ने गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके अलावा उनके नेतृत्व में इंडियन स्पोर्ट्स एसोसिएशन की ओर से जिले की कबड्डी की टीम 2015 में बुलंदशहर में आयोजित उत्तर प्रदेश ग्रामीण खेल महासंघ में खेली थी, जिसमें टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। टीम ने इंडियन स्पोर्ट्स नेशनल गेम्स 2017 में तीसरा और 2018 में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उत्तराखंड स्पोर्ट्स स्टेट गेम 2018 में भी उनके नेतृत्व में कबड्डी टीम ने प्रतिभाग किया।
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सरकार से सुविधा नहीं मिलने का मलाल
वरुण के अनुसार उनकी परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। ऐसे में घरवाले बमुश्किल पढ़ाई ही करा पा रहे थे, लेकिन उनके अंदर खेलने की चाह कभी खत्म नहीं हुई। इसकी वजह से उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अपना पसंद का खेल कबड्डी भी जारी रखा, लेकिन उन्हें सरकार की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिला। जिसकी वजह से वह आगे नहीं बढ़ पाए। वरुण कहते हैं कि सरकार सभी खेलों में समान अवसर उपलब्ध कराए, ताकि खिलाड़ी आगे बढ़ सकें।
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