मदरसा कमरुल उलूम इस्लामिया में माहे रबी-उल-अव्वल शरीफ के मुबारक मौके पर जश्ने ईद मीलादुन्नबी सल्ललाहो अलैहिवसल्लम का आयोजन किया गया। इसमें दूर दराज से आऐ हुए उलमा-ए-कराम ने हजरत मोहम्मद सल्ललाहो अलैहिवसल्लम की जिंदगी पर रोशनी डाली। मौलाना यासीन अली उस्मानी ने जलसे को खिताब करते हुए कहा कि हजरत मोहम्मद साहब किसी एक जगह या एक कौम के लिए रहमत बनकर तशरीफ नहीं लाए, बल्कि तमाम आलम के लिए रहमत बनकर आए।
मौलाना उस्मानी ने औरतों के हुकूक के बारे मे बताया कि मजहब-ए-इस्लाम ने औरतों को जो मुकाम और दर्जा अता किया है, वह दुनिया के किसी मजहब ने नहीं दिया। मौलाना सय्यद नूर आलम मिस्बाही ने फ रमाया कि हजरत मोहम्मद साहब ने जब मक्का फतह किया तो उन सभी मक्कावासियों को माफ फरमा दिया, जिनके जुल्म-ओ-ज्यादती की वजह से मक्का से हिजरत करनी पड़ी थी।
मौलाना तौहीद अहमद मिस्बाही ने फ रमाया कि मोहम्मद मुस्तफा सल्ललाहो अलैहिवसल्लम की तालीमात अमन और भाईचारे का पैगाम देती है। प्रोग्राम की सदारत मदरसा कमरुल उलूम के प्रबंधक हाफिज रफ ी अहमद खां और निजामत हाफिज ज्याउल मुस्तफ ा ने की। प्रोग्राम में कारी तय्यब, मौलाना इस्मत अली खां मिस्बाही, हाफिज इम्तियाज अहमद खां, मौलाना राहत अली खां मिस्बाही, मौलाना आजम खां मिस्बाही आदि मौजूद रहे।