बदायूं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पूर्व बाजार पूरी तरह से सज गए हैं। लड्डू गोपाल के पालनों व पोशाकों से सजीं दुकानों पर लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं।
पिछले दो सालों से कोरोना का साया होने की वजह से लोग खुलकर जन्माष्टमी नहीं मना पाए थे। इस बार कोरोना का प्रकोप कम होने की वजह से लोगों में जन्माष्टमी को लेकर एक अलग ही उत्साह दिखाई दे रहा है। बाजार लड्डू गोपाल के झूलों, सिंहासनों, ज्वेलरी और पोशाकों से सज गया है। महिलाएं सामान की खरीदारी में लगी हैं। बाजार में 70 से 1000 रुपये तक के पालने, 50 से 500 रुपये तक के सिंहासन, 10 से 250 रुपये तक की ज्वेलरी और 100 से 700 रुपये तक के पोशाकों की बिक्री हो रही है।
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बाजार से गायब है चीन का सामान और मूर्तियां
बाजारों में कन्हैया को सजाने के लिए तरह तरह के सामान उपलब्ध हैं। इसके साथ ही घरों में सजने वाली झांकी के सामानों में जहां हर साल चीन के सामानों का बोलबाला रहता था, वहीं इस साल चीन का सामान बाजार से पूरी तरह गायब है। लोग देश में बनी चीजों को ज्यादा तवज्जो देने लगे हैं। इस बार ग्राहक खिलौनों से लेकर सिंहासन और झूले भी देश के कारीगरों द्वारा बनाए गए ही ले रहे हैं।
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लुभा रहा लड्डू गोपाल का शयनकक्ष
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को विश्राम के लिए पलंग और मच्छरदानी लगा हुआ शयनकक्ष भी लोगों को लुभा रहा है। लकड़ी के पलंग पर भगवान का बिस्तर लगा हुआ है और इसके चारों ओर मच्छरदानी लगी है। इसकी कीमत 250 रुपये है। वहीं, पीतल और लकड़ी के झूले और सिंहासन भी मौजूद हैं।
दो दिन मनाई जाएगी जन्माष्टमी
पंडित गिरीश शर्मा ने बताया कि भगवान कृष्ण चंद्रवंशी है, सो भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय रात्रि में चंद्र अर्घ्य और पूजा के समय अष्टमी तिथि होनी चाहिए। ऐसे में 18 अगस्त को रात 09:22 से अष्टमी शुरू होगी, जो जन्म के समय विद्यमान रहेगी। ऐसे में 18 अगस्त बृहस्पतिवार को दिन में व्रत रहकर रात में चंद्रदेव को अर्घ्य देना, भगवान की पूजा करना, झूला-झुलाना, भोग लगाना, हवन, मंत्र, श्लोक, स्त्रोत का पाठ करने फल बहुत-बहुत दिव्य होता है। वहीं शुक्रवार को (वैष्णव जन) भक्त जन यह पर्व उदयातिथि के अनुसार मनाएंगे। अष्टमी उदयातिथि इसी दिन मिलेगी। इस दिन सूर्य उदय के साथ अष्टमी शुरू मिलेगी, जो रात 11 बजे तक रहेगी, फिर नवमी शुरू होगी।