बदायूं। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत 4505 प्रसव से मात्र 641 को ही धनराशि का आवंटन हुआ। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में धनराशि आवंटित न होने पर नाराजगी जताई।
डीएम ने संस्थागत प्रसव, जननी सुरक्षा योजना, महिला नसबंदी, कुपोषित बच्चों का चिह्नांकन, आभा आईडी की लक्ष्य के सापेक्ष धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। एमओआइसी को निर्देश दिए कि वह आशा व एएनएम के कार्यों की नियमित समीक्षा करें। ब्लॉक म्याऊं व बिल्सी की प्रगति कई बिंदुओं पर खराब होने पर डीएम ने सुधार के निर्देश दिए। एक से 20 अप्रैल तक जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों में 9813 के सापेक्ष सरकारी अस्पतालों में 2397 व निजी अस्पतालों 1591 प्रसव कराए गए। डीएम ने सीएमओ को निर्देशित किया कि वह इसकी स्वयं मॉनिटरिंग करें।
डीएम ने जननी सुरक्षा योजना अंतर्गत मंत्रा एप पर दर्शाई गई कुल 4505 डिलीवरी में से मात्र 641 को अनुमन्य धनराशि दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। सभी को धनराशि तत्काल देने के निर्देश दिए।
अप्रैल में महिला नसबंदी के लक्ष्य 2981 के सापेक्ष मात्र नौ नसबंदी हुई है। यह लक्ष्य के सापेक्ष 3.02 प्रतिशत है। डीएम ने इसमें सुधार लाने के निर्देश दिए। कहा कि हर महीने कम से कम 24 कुपोषित बच्चों का इलाज हो, ताकि वह स्वस्थ होकर एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकें। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों में टीम के दौरे के लिए दिन कम से कम 90 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति हो।
ई-कवच पर 22 मई तक पांच वर्ष से कम उम्र के 416 बच्चों की स्क्रीनिंग में से 72 का चिन्हांकन हुआ। इसमें सुधार लाने के निर्देश दिया। बैठक में सीडीओ केशव कुमार, सीएमओ डॉ. रामेश्वर मिश्रा सहित एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ व सभी एमओआइसी मौजूद रहे।