बदायूं। रामलीला महोत्सव के मेले में लगने वाले झूले की अनुमति देने के नाम पर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में सिटी मजिस्ट्रेट के स्टेनो के विरुद्ध जांच शुरू कर दी गई है। डीएम के निर्देश पर गठित एडीएम प्रशासन मानवेंद्र सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट सुमित सिंह की कमेटी को तीन दिन में यानी बुधवार तक जांच कर रिपोर्ट डीएम को देनी है। इस प्रकरण में रामलीला कमेटी के सदस्य और स्टेनो के बयान दर्ज होंगे।
रामलीला महोत्सव चार अक्तूबर से प्रस्तावित है। इसके लिए रामलीला कमेटी की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में नौ सितंबर को आयोजन, दुकानें और झूले लगाने की अनुमति मांगी गई थी। कमेटी के पदाधिकारियों का आरोप है कि अनुमति के बदले कार्यालय के स्टेनो ने 50 हजार रुपये की मांग की। कमेटी ने रकम देने से साफ इन्कार कर दिया। आरोप है कि रुपये देने से मना करने के बाद स्टेनो की ओर से झूला लगाने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया। कमेटी के पदाधिकारियों से कहा कि वह पहले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से एनओसी लेकर आएं, इसके बाद ही झूले की अनुमति पर विचार किया जाएगा।
कमेटी के पदाधिकारियों ने भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता से शिकायत की। भाजपा जिलाध्यक्ष ने फोन पर डीएम से शिकायत की। मामले की जानकारी मिलने पर डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए एडीएम प्रशासन मानवेंद्र सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट सुमित सिंह को जांच सौंपी। दोनों अधिकारियों की कमेटी आरोपों के साथ अनुमति प्रक्रिया और पीडब्ल्यूडी की एनओसी से जुड़े पूरे प्रकरण की पड़ताल करेगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही रुपये मांगने के आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी। इधर, डीएम अवनीश राय ने बताया कि रामलीला महोत्सव के मेले के झूले की अनुमति के नाम पर धनराशि की मांग की गई है। ऐसे आरोप सिटी मजिस्ट्रेट के स्टेनो पर लगे है। इसकी दो सदस्यीय टीम जांच करेंगी। उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन-
-दो अक्तूबर को स्टेनो के द्वारा रुपये मांगने की बात कही गई। इसकी शिकायत की, तो उसके कुछ समय बाद में मेला की अनुमति का पत्र दे दिया गया है। हालांकि झूले की अनुमति अभी नहीं दी है। झूले लग रहे हैं, उनके लगने के बाद में ऑडिट कराया जाएगा।
-अरविंद कांत, अध्यक्ष, श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी