बदायूं। पुरानी चुंगी से शहवाजपुर चौराहे तक सड़क किनारे बनी दुकानें और मकान अब नगर पालिका और जिला प्रशासन की नजर में आ चुकी हैं। इनका निर्माण अवैध बैनामा के आधार पर किए गए हैं। पुष्टि के लिए नगर पालिका अध्यक्ष ने सभी बिल्डिंग मालिकों से उनके बैनामे मांगे हैं, साथ ही इसके लिए उन्हें तीन दिन का समय दिया है।
मोहल्ला लोचीनगला में राय साहब की काफी पुरानी धर्मशाला है। इसका मालिकाना हक किसके पास है, ये आसपास के लोग भी नहीं जानते। कुछ लोग इसे वक्फ की संपत्ति बताते हैं तो कुछ अपनी निजी संपत्ति बता रहे हैं। बताया जाता है कि इस पर मालिकाना हक जताते हुए काफी समय पहले एक व्यक्ति ने सड़क किनारे पड़ी खाली जमीन धर्मशाला की बताते हुए बैनामे करने शुरू कर दिए थे। लाखों रुपये देकर तमाम लोगों ने इस जगह को खरीद लिया और इस पर दुकानें, भवन, गेस्टहाउस आदि बना लिए। बताते हैं कि उस व्यक्ति ने बाकायदा बैनामे किए थे। केवल यही नहीं धर्मशाला के अंदर की भी काफी जमीन बेच दी। यहां दुकानें व बिल्डिंग बनाने वालों ने सड़क पर भी कब्जा कर लिया था, जिसे पिछले दिनों सिटी मजिस्ट्रेट ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हटवा दिया था। अब इस जमीन पर नगर पालिका और प्रशासन की नजर पड़ गई है। पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल व सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने मंगलवार को निरीक्षण किया। जब पालिकाध्यक्ष को दुकानों के बैनामों के बारे में पता चला तो उन्हें भी शंका हुई, जिस पर उन्होंने सभी से बैनामे मांगे हैं। उन्होंने बताया कि पता चला है कि यह जमीन सरकारी है, जिसके बैनामे फर्जी आधार पर किए गए हैं। इसको देखते हुए बैनामे मांगे गए हैं, जिसके लिए उन्हें तीन दिन का समय दिया गया है। बैनामे देखने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- पिछले दिनों मछली बाजार का पालिकाध्यक्ष ने निरीक्षण किया था तथा खुले में मीट न बेचे जाने की चेतावनी दी थी। मंगलवार को पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल जब दोबारा वहां पहुंची तो खुले में मीट बिक रहा था साथ ही जो दुकानें कोर्ट केस के कारण बंद करा दी गई थीं, वह भी खुली मिलीं। इस पर पालिकाध्यक्ष व सिटी मजिस्ट्रेट ने एक बार फिर उन्हें चेतावनी दी। पालिकाध्यक्ष ने बताया कि इन लोगों के लिए जमीन चिह्नित करके दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा, ताकि इनका भी रोजगार न छिने, लेकिन खुले में मीट नहीं बिकने दिया जाएगा। इसके अलावा पालिकाध्यक्ष ने गद्दीचौक पर भी निरीक्षण किया, जहां एक व्यक्ति द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा करके उसे खुद की बताया जा रहा है। पालिकाध्यक्ष ने वहां के भी कागज चेक करने को कहा है।