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Budaun News: बाढ़ के मद्देनजर प्रशासन ने नदियों से सटे गांवों की निगरानी बढ़ाई

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कछला गंगा घाट। संवाद
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बुधवार को गंगा के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी, रामगंगा में घटा जलस्तर
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में देखने को मिल रहा है। मंगलवार को जहां अन्य दिनों की अपेक्षा गंगा और रामगंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज हुई, वहीं बुधवार को रामगंगा का जलस्तर कम हो गया। हालांकि गंगा के जलस्तर में थोड़ी और बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाढ़ की आशंका के मद्देनजर प्रशासन ने दोनों नदियों के पास बसे गांवों में निगरानी बढ़ा दी है।
जिले से होकर गंगा और रामगंगा दो नदियां निकल रहीं हैं। बारिश के समय में इनके जलस्तर में इजाफा होने लगता है। खासतौर पर जब पहाड़ी इलाकों में बारिश अधिक हो, तब वहां से पानी छोड़ा जाता है। गंगा और रामगंगा के किनारे वाले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। मंगलवार को नरौरा से 48,653, बिजनौर से 24,294 व हरिद्वार से 37,408 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
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वहीं बुधवार को नरौरा से 25,060, बिजनौर से 24,464 व हरिद्वार से 31695 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रामगंगा का जलस्तर मंगलवार की अपेक्षा बुधवार को .120 सेंटीमीटर कम हो गया। इससे प्रशासन ने कुछ राहत की सांस ली, हालांकि गंगा और रामगंगा के समीप बसे गांव में अधिकारी अब भी निगाहें बनाए हुए है।
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पानी छोड़ा जाना हुआ कम, पर बढ़ा जलस्तर
नरौरा, बिजनौर और हरिद्वार से छोड़े जाने वाला पानी मंगलवार की अपेक्षा काफी कम रहा, लेकिन गंगा का जलस्तर मंगलवार की अपेक्षा बुधवार को थोड़ा बढ़ गया है। मंगलवार को यह 161.89 मीटर गेज दर्ज किया था जो बुधवार को 162 मीटरगेज दर्ज किया गया है। आने वाले दिनों में पानी कम छोड़े जाने से इसमें और कमी आने का अनुमान है।

अंतिसंवेदनशील में हैं ये स्थान
उसहैत, उसावां और गंगा महावा बांध के किनारे के गांवों को अभी अति संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। अगर जलस्तर बढ़ता है तो इनके आसपास के इलाकों में खतरा बन सकता है। ऐसे में यहां सुरक्षा के इंतजाम और कड़े करने होंगे।
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गंगा और रामंगगा में पहले की अपेक्षा पानी कम हुआ है, लेकिन फिर भी गांवों पर निगाहें बनाए हुए हैं, ताकि अगर कहीं कोई दिक्कत आए तो तुरंत टीम को भेजा जा सके।
-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता बाढ़ खंड
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